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केंद्रीय बजट से UP के MSME और वस्त्र उद्योग को नई उड़ान, लाखों को मिलेगा रोजगार का संबल

एकीकृत वस्त्र कार्यक्रम, ग्रोथ फंड और ग्रामीण उद्योगों पर विशेष फोकस, कॉरपोरेट मित्र एवं विरासत औद्योगिक क्लस्टर, खादी एवं ग्रामोद्योग से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती, एमएसएमई के लिए ग्रोथ फंड व वित्तीय सहयोग

लखनऊ, 2 फरवरी 2026:

संसद में पेश केंद्रीय बजट ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई), खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम, हथकरघा और वस्त्रोद्योग से जुड़े क्षेत्रों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोले हैं। बजट में किए गए प्रावधान यूपी जैसे श्रम प्रधान और परंपरागत उद्योगों वाले राज्य के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। इन पहलों से उत्पादन और निवेश बढ़ने के साथ लाखों उद्यमियों, कारीगरों और श्रमिकों को स्थायी आजीविका के अवसर भी मिलेंगे।

वस्त्र क्षेत्र के लिए एक व्यापक और एकीकृत कार्यक्रम का प्रस्ताव किया गया है। इसमें राष्ट्रीय फाइबर योजना, वस्त्र विस्तार एवं रोजगार योजना, राष्ट्रीय हथकरघा एवं हस्तशिल्प कार्यक्रम, टेक्स-इको पहल और समर्थ 2.0 जैसी योजनाएं शामिल हैं। इनका उद्देश्य उत्पादन क्षमता बढ़ाने, कौशल विकास को प्रोत्साहित करने और निर्यात को गति देने के साथ-साथ रोजगार सृजन को मजबूत करना है। इसके साथ ही मेगा टेक्सटाइल पार्कों की स्थापना से उत्तर प्रदेश में वस्त्र और परिधान उद्योग में निवेश के नए अवसर खुलेंगे। इससे राज्य की औद्योगिक अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा।

एमएसएमई क्षेत्र को मजबूती देने के लिए बजट में 10,000 करोड़ रुपये के एसएमई ग्रोथ फंड की स्थापना का प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त आत्मनिर्भर भारत फंड में 2,000 करोड़ की अतिरिक्त पूंजी डाली जाएगी। इससे छोटे और मध्यम उद्यमों को विस्तार के लिए आवश्यक वित्तीय सहायता मिल सकेगी। समय पर भुगतान की समस्या से जूझ रहे उद्यमों के लिए TReDS प्लेटफॉर्म के दायरे का विस्तार किया जाएगा जिससे उनकी कार्यशील पूंजी की चुनौती कम होगी।

बजट में खादी, हथकरघा और हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल शुरू करने का भी प्रस्ताव है। इस पहल के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने के साथ बुनकरों और कारीगरों को आधुनिक बाजार से जोड़ा जाएगा। इससे उनकी आय में वृद्धि होगी। वहीं ‘कॉरपोरेट मित्र’ व्यवस्था के जरिए एमएसएमई को व्यावसायिक मार्गदर्शन, तकनीकी सहयोग और बाजार तक पहुंच सुनिश्चित की जाएगी।

इसके अलावा देशभर में 200 विरासत इंडस्ट्रियल क्लस्टरों के कायाकल्प का प्रस्ताव है। इनमें यूपी के हथकरघा और हस्तशिल्प क्लस्टर भी शामिल होंगे। निर्यात को बढ़ावा देने के लिए जूते के ऊपरी हिस्सों के शुल्क-मुक्त आयात का विस्तार और चमड़ा व वस्त्र परिधान के निर्यात की समय-सीमा में वृद्धि जैसे कदम उठाए गए हैं।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम उद्योग, हथकरघा और वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान ने कहा कि केंद्रीय बजट उद्योग, किसानों और युवाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगा और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को और मजबूती देगा।

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