लखनऊ, 9 जनवरी 2026:
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को मुख्यमंत्री आवास के सभागार में हिंदुजा फाउंडेशन द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘प्रारंभिक उत्तर भारत व इसके सिक्के’ का विमोचन किया। इस दौरान उन्होंने फाउंडेशन द्वारा संग्रहित दुर्लभ और प्राचीन सिक्कों का अवलोकन भी किया। कार्यक्रम में हिंदुजा फाउंडेशन के जनकल्याणकारी कार्यों पर आधारित एक लघु फिल्म भी दिखाई गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पुस्तक भारत की एकता, लोकतांत्रिक चेतना और सांस्कृतिक विरासत को ठोस प्रमाणों के साथ प्रस्तुत करती है।
इसके अलावा उन्होंने कहा कि दुनिया में जिसे भी लोकतंत्र को समझना है, उसे भारत से सीखना होगा। उन्होंने कहा कि भारत केवल दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र नहीं है, बल्कि लोकतंत्र की जननी भी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जी20 सम्मेलन में यही बात दोहराई थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि वैशाली जैसे गणराज्य इस बात का प्रमाण हैं कि भारत में लोकतांत्रिक परंपराएं हजारों वर्ष पुरानी हैं।

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि भारत ने हर जाति, मत और संप्रदाय को समान अवसर दिया और शरण दी। उन्होंने वसुधैव कुटुम्बकम की भावना को भारत की आत्मा बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पश्चिमी विद्वानों ने लंबे समय तक यह भ्रम फैलाया कि भारत कभी एक नहीं था, जबकि वर्ष 1947 का विभाजन ब्रिटिश साजिश का परिणाम था। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक रूप से भारतवर्ष में आज का पाकिस्तान और बांग्लादेश भी शामिल रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पुस्तक में अयोध्या, मथुरा, कौशाम्बी, काशी, पांचाल सहित कई क्षेत्रों के तांबे, चांदी और मिश्र धातु के सिक्के शामिल हैं। ये सिक्के उस समय की शासन व्यवस्था, व्यापार, भूगोल और समाज का प्रमाण देते हैं। उन्होंने कहा कि जहां भारत ने हमेशा तथ्य और साक्ष्य के आधार पर अपनी बात रखी, वहीं पश्चिमी देशों ने लोकतंत्र को अपना योगदान बताकर इतिहास को तोड़ने मरोड़ने का प्रयास किया।

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि भारत ने मापन और तोल की वैज्ञानिक व्यवस्था सबसे पहले विकसित की। माशा और तोला जैसी इकाइयां आज भी प्रचलन में हैं। उन्होंने मौर्य काल को भारत का स्वर्ण युग बताते हुए कहा कि उस समय विश्व अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी 46 प्रतिशत थी। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत आज दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विजन 2047 का पहला प्रण अपनी विरासत पर गर्व करना है, जिसका उदाहरण अयोध्या, काशी और सनातन धरोहरों का संरक्षण है।
इस कार्यक्रम के दौरान पुस्तक के लेखक प्रो. देवेन्द्र हांडा ने जानकारी दी कि ब्रिटिश म्यूजियम में सुरक्षित एक प्राचीन सिक्के पर ‘सावित्री पुत्र जनपदस’ अंकित है। उन्होंने कहा कि यह प्रमाण दर्शाता है कि सावित्री और सत्यवान की कथा केवल कल्पना नहीं, बल्कि सनातन इतिहास से जुड़ी वास्तविक घटनाओं पर आधारित है। प्रो. हांडा ने मद्र राज और पोरस के वंशजों से संबंधित सिक्कों का भी उल्लेख किया, जो अब तक प्रचलित कई ऐतिहासिक धारणाओं को चुनौती देते हैं। इस अवसर पर हिंदुजा समूह के ट्रस्टी पीपी हिंदुजा, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह, पुस्तक के लेखक प्रो. देवेन्द्र हांडा तथा हिंदुजा परिवार के वरिष्ठ सदस्य और विभिन्न पदाधिकारी उपस्थित रहे।






