Uttar Pradesh

अंबेडकर जयंती से पहले CM योगी की ‘पाती’: शिक्षा, समता और सशक्त समाज का दिया संदेश

बाबा साहेब के विचारों को बताया मार्गदर्शक, ‘जीरो पॉवर्टी’ लक्ष्य के साथ योजनाओं का किया उल्लेख

लखनऊ, 13 अप्रैल 2026:

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने भारतरत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती से एक दिन पहले सोमवार को प्रदेशवासियों के नाम भावनात्मक ‘पाती’ लिखकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। योगी की पाती नाम से लिखे इस पत्र में मुख्यमंत्री ने बाबा साहेब के जीवन, विचारों और उनके योगदान को विस्तार से याद करते हुए लोगों से उनके आदर्शों को अपनाने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने अपने पत्र की शुरुआत मेरे सम्मानित प्रदेशवासियों संबोधन से करते हुए लिखा कि 14 अप्रैल का दिन उस महान व्यक्तित्व को कृतज्ञता अर्पित करने का अवसर है जिसकी दूरदृष्टि ने करोड़ों लोगों को गरिमामय जीवन का अधिकार दिलाया। उन्होंने बाबा साहेब को विजन, मिशन और लगन का प्रतीक बताते हुए विशेष रूप से शिक्षा और आर्थिक सोच में उनकी दूरदर्शिता को अमूल्य बताया।

पत्र में मुख्यमंत्री ने बाबा साहेब के प्रसिद्ध संदेश शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो का उल्लेख करते हुए कहा कि यह आज भी समाज के लिए उतना ही प्रासंगिक है। उन्होंने बताया कि बाबा साहेब अपने समय के सबसे शिक्षित व्यक्तियों में थे। उनके पास 35 हजार से अधिक पुस्तकों का संग्रह था। साथ ही वे प्रतिदिन 16 से 18 घंटे अध्ययन करते थे।

सीएम योगी ने बाबा साहेब के व्यक्तित्व के मानवीय पहलू को भी रेखांकित किया। उन्होंने एक प्रसंग साझा करते हुए बताया कि कैसे बाबा साहेब ने अपने सहयोगी सुदामा के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए ठंड में उन्हें अपना ओवरकोट ओढ़ा दिया था।

सरकार की योजनाओं का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार बाबा साहेब के विचारों को अपनाते हुए गरीब, वंचित, महिलाओं और युवाओं तक योजनाओं का लाभ पहुंचा रही है। राशन, आवास, शौचालय, स्वास्थ्य सेवाएं और ‘घरौनी’ योजना के जरिए महिलाओं को मालिकाना अधिकार दिए जा रहे हैं। छात्रवृत्ति, सामूहिक विवाह योजना और अटल आवासीय विद्यालयों के माध्यम से वंचित वर्गों को सशक्त बनाया जा रहा है।

उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश में 6 करोड़ से अधिक लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर आए हैं। अब सरकार ‘जीरो पॉवर्टी’ लक्ष्य की ओर बढ़ रही है। अंत में मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे अपने घरों में अच्छी पुस्तकें रखें, स्वयं पढ़ें और बच्चों को भी पढ़ने के लिए प्रेरित करें तभी बाबा साहेब का सपना साकार होगा।

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