लखनऊ, 25 फरवरी 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ में बुधवार को कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के समर्थन में कलेक्ट्रेट पर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का नेतृत्व लखनऊ जिलाध्यक्ष रुद्रदमन सिंह ‘बबलू’, शहर (उत्तरी) अध्यक्ष अमित श्रीवास्तव ‘त्यागी’ और शहर (दक्षिणी) अध्यक्ष डॉ. शहजाद आलम ने किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शंकराचार्य पर अत्याचार बंद करो के नारे लगाते हुए प्रदेश सरकार पर संतों और हिंदू धर्म की छवि धूमिल करने का आरोप लगाया।
कांग्रेस नेताओं ने डीएम के माध्यम से भेजा। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि शंकराचार्य और उनके शिष्यों के साथ कथित दुर्व्यवहार, उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर और धार्मिक गतिविधियों में बाधा डालना धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह केवल संत समाज का ही अपमान नहीं बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों पर भी सीधा प्रहार है।

प्रदर्शनकारियों ने कुम्भ के दौरान मौनी अमावस्या के अवसर पर पुलिस द्वारा शंकराचार्य और उनके शिष्यों को स्नान से रोके जाने तथा बटुकों के साथ कथित दुर्व्यवहार का मुद्दा उठाया। साथ ही, शंकराचार्य एवं उनके शिष्य स्वामी मुकुदानन्द ब्रह्मचारी सहित अन्य के खिलाफ दर्ज यौन शोषण संबंधी एफआईआर को फर्जी बताते हुए निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की गई। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि आरोप लगाने वालों की पृष्ठभूमि और संभावित प्रेरणाओं की निष्पक्ष समीक्षा जरूरी है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय के निर्देश पर प्रदेशभर में जिला और शहर इकाइयों को प्रदर्शन करने के लिए कहा गया थ। लखनऊ में नेताओं ने दो टूक कहा कि शंकराचार्य का पद सनातन परंपरा में सर्वोच्च आध्यात्मिक पदों में से एक है। संविधान धार्मिक स्वतंत्रता तथा धार्मिक संस्थाओं को अपने मामलों के प्रबंधन का अधिकार देता है। पार्टी का दावा है कि यह आंदोलन संतों के सम्मान और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए जारी रहेगा।






