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गो संरक्षण से बदली खेती की तस्वीर, UP में नेचुरल फार्मिंग बनी किसानों की नई ताकत

योगी सरकार ने बंद किए अवैध बूचड़खाने, प्रदेश में 7,500 से अधिक गोशालाओं में 12.58 लाख गोवंश संरक्षित, 94 हजार हेक्टेयर में बढ़ा गो आधारित प्राकृतिक खेती का दायरा

लखनऊ, 31 मार्च 2026:

यूपी में गो संरक्षण और प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार वर्ष 2017 के बाद से प्रदेश में गो तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण हुआ है। अवैध बूचड़खानों के खिलाफ कार्रवाई के चलते गो संरक्षण व्यवस्था मजबूत हुई है। इसका परिणाम यह हुआ कि आज प्रदेश की 7,500 से अधिक गोशालाओं में करीब 12.58 लाख गोवंश का संरक्षण किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि सीएम योगी के नेतृत्व में गो आधारित प्राकृतिक खेती मिशन को तेजी से लागू किया जा रहा है। इस मिशन का उद्देश्य गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाना और किसानों की आय में वृद्धि करना है। वर्तमान में प्रदेश के लगभग 94,000 हेक्टेयर क्षेत्र में गो आधारित प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। वहीं बुंदेलखंड के बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, जालौन, झांसी, ललितपुर और महोबा जैसे जिलों में करीब 23,500 हेक्टेयर क्षेत्र में यह मॉडल सफलतापूर्वक अपनाया जा रहा है।

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श्याम बिहारी ने बताया कि एक गाय से प्रतिदिन लगभग 5 लीटर गोमूत्र और 10 किलोग्राम गोबर प्राप्त होता है। यह जैविक खेती के लिए अत्यंत उपयोगी है। इनसे तैयार जैविक उत्पाद किसानों की लागत घटाने के साथ-साथ उत्पादन की गुणवत्ता भी सुधार रहे हैं।

प्रदेश में लगभग 1.90 करोड़ गोवंश होने के कारण इस क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। वर्तमान में 7,716 स्थानों पर गो संरक्षण का कार्य चल रहा है। गोशालाएं जैविक खाद उत्पादन के केंद्र के रूप में विकसित हो रही हैं। यह मॉडल किसानों की आय बढ़ाने के साथ मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती दे रहा है।

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