लखनऊ, 2 जनवरी 2026:
उत्तर प्रदेश में जन वितरण प्रणाली को मजबूत और पारदर्शी बनाने के लिए जीपीएस से लैस ट्रैकिंग सिस्टम प्रभावी साबित हो रहा है। खाद्यान्न उठान और वितरण में अब चोरी, लीकेज और गड़बड़ी पर काफी हद तक रोक लग चुकी है। प्रदेश में 5 हजार से अधिक जीपीएस युक्त वाहनों के जरिए गोदाम से उचित दर दुकानों तक खाद्यान्न की हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।
भारतीय खाद्य निगम के डिपो से लेकर राशन दुकानों तक खाद्यान्न का पूरा परिवहन अब डिजिटल निगरानी में है। वाहन कहां से चला, किस रास्ते से गया और समय पर गंतव्य तक पहुंचा या नहीं, इसकी जानकारी रियल टाइम में दर्ज हो रही है। इससे रास्ते में होने वाली हेराफेरी और कालाबाजारी लगभग खत्म हो गई है।
धान और मोटे अनाज की खरीद में भी सख्ती
खरीफ विपणन सत्र 2025 26 के दौरान धान खरीद में भी जीपीएस ट्रैकिंग को अनिवार्य किया गया है। प्रदेश के सभी जिलों में क्रय केंद्रों से राइस मिलों तक धान पहुंचाने वाले 3773 वाहनों में जीपीएस डिवाइस लगाए गए हैं। इसके अलावा मक्का, ज्वार और बाजरा जैसे मोटे अनाज के परिवहन में लगे 1428 वाहनों को भी जीपीएस से जोड़ा गया है। इससे खरीद से लेकर भंडारण तक की पूरी व्यवस्था पारदर्शी बनी है।
डोर स्टेप डिलीवरी से मजबूत हुआ सिस्टम
प्रदेश में ब्लॉक गोदाम व्यवस्था को खत्म कर सिंगल स्टेज डोर स्टेप डिलीवरी मॉडल लागू किया गया है। इसके तहत एफसीआई डिपो से सीधे राशन दुकानों तक खाद्यान्न पहुंचाया जा रहा है। यह व्यवस्था ई टेंडर के माध्यम से चुने गए ठेकेदारों के जरिए संचालित हो रही है, जिससे मानवीय दखल कम हुआ है और जवाबदेही तय हुई है।
लाभार्थियों तक सुरक्षित पहुंच रहा खाद्यान्न
वित्तीय वर्ष 2025 26 में अब तक प्रदेश में 8.03 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न और मोटे अनाजों का आवंटन किया जा चुका है। इसी अवधि में अंत्योदय लाभार्थियों के लिए 36850.35 मीट्रिक टन चीनी का वितरण तय किया गया है। जीपीएस ट्रैकिंग की वजह से यह सुनिश्चित हो पा रहा है कि खाद्यान्न बिना कटौती और समय पर लाभार्थियों तक पहुंचे।






