न्यूज डेस्क, 5 मई 2026:
अभिनेता से नेता बने थलापति विजय ने तमिलनाडु की राजनीति में भूचाल ला दिया। इसने दशकों पुरानी सत्ता संरचना को हिला कर रख दिया। महज दो साल पहले राजनीति में कदम रखने वाले विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कड़गम (टीवीके) ने विधानसभा चुनाव में 234 सीटों में से 108 सीटें जीतकर खुद को सबसे बड़ी पार्टी के रूप में स्थापित कर लिया है।
हालांकि विजय की यह ऐतिहासिक जीत बहुमत के जादुई आंकड़े 118 से 10 सीट कम रह गई। इससे सरकार गठन को लेकर सस्पेंस गहरा गया है। अब तमिलनाडु की सियासत का सबसे बड़ा सवाल यही है कि विजय के लिए किंगमेकर कौन बनेगा?

इस चुनाव में तमिलनाडु की दो पारंपरिक दिग्गज पार्टियों द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) को करारी हार का सामना करना पड़ा। डीएमके को 59 और एआईएडीएमके को 47 सीटों पर संतोष करना पड़ा। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री एमके स्टालिन खुद चुनाव हार गए। यह इस परिणाम की गंभीरता को दर्शाता है।
विजय ने अपनी सीट 49 हजार से अधिक वोटों से जीतकर अपनी लोकप्रियता का लोहा मनवाया। उनके नेतृत्व में टीवीके ने 1967 से चली आ रही द्रविड़ राजनीति की द्विदलीय परंपरा को तोड़ दिया। चुनाव नतीजों के बाद चेन्नई के पास पनैयूर स्थित पार्टी मुख्यालय में नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक हुई। इसमें विजय को सर्वसम्मति से विधायक दल का नेता चुना गया।

इसके बाद उन्होंने राज्यपाल को पत्र लिखकर सरकार बनाने का दावा पेश किया और बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन का समय मांगा है। राजनीतिक हलकों में हलचल उस वक्त और तेज हो गई जब राहुल गांधी ने विजय को फोन कर जीत की बधाई दी। इसके बाद कांग्रेस के संभावित समर्थन को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं।
अब सरकार गठन के तीन प्रमुख विकल्प सामने हैं। पहला टीवीके, डीएमके गठबंधन के छोटे दलों जैसे कांग्रेस (5), लेफ्ट (4), आईयूएमएल (2) और वीसीके (2) के साथ मिलकर सरकार बनाए। हालांकि इस समीकरण में इन सभी छोटे दलों की सहमति के बिना बहुमत के लिए कुछ सीटों की कमी रह सकती है।
दूसरा विकल्प डीएमके और एआईएडीएमके गठबंधन के छोटे दलों को तोड़कर अपने साथ जोड़ना है। इससे बहुमत का आंकड़ा पार किया जा सके। तीसरा और सबसे चर्चित विकल्प एआईएडीएमके के साथ सीधे गठबंधन। अगर टीवीके (108) और एआईएडीएमके (47) साथ आते हैं तो यह 155 सीटों के साथ मजबूत और स्थिर सरकार बना सकते हैं।

सूत्रों के मुताबिक टीवीके सभी संभावित सहयोगी दलों को मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व देने पर भी विचार कर रही है जिससे सरकार स्थिर और टिकाऊ बन सके। वैसे तमिलनाडु की राजनीति में विजय की एंट्री पूरी तरह फिल्मी रही। जहां सुपरस्टार रजनीकांत राजनीति में कदम रखकर पीछे हट गए और कमल हासन का असर सीमित रहा, वहीं विजय ने जनता की तीसरे विकल्प की तलाश को पूरा कर दिया।
अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि थलापति विजय किसके साथ हाथ मिलाकर सत्ता की कुर्सी तक पहुंचते हैं। आने वाले 48 घंटे तमिलनाडु की राजनीति की दिशा तय करेंगे।






