बिजनेस डेस्क, 15 जनवरी 2026:
आर्थिक मोर्चे पर भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। World Bank ने भारत की आर्थिक विकास दर को लेकर सकारात्मक आकलन किया है। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्था ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 7.2 प्रतिशत कर दिया है। यह अनुमान जून में जताए गए अनुमान से 0.9 प्रतिशत ज्यादा है।
घरेलू मांग बनी विकास की सबसे बड़ी ताकत
विश्व बैंक ने अपनी प्रमुख रिपोर्ट ग्लोबल इकोनॉमिक प्रॉस्पेक्ट्स में कहा है कि भारत की मजबूत घरेलू मांग आर्थिक वृद्धि की मुख्य वजह बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, ऊंचे आयात शुल्क जैसी वैश्विक चुनौतियों के बावजूद देश की अर्थव्यवस्था स्थिर बनी हुई है। मजबूत निजी उपभोग और बढ़ती घरेलू गतिविधियों ने विकास को गति दी है।

अमेरिका के शुल्क के असर पर भी संतुलन
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अमेरिका द्वारा कुछ उत्पादों पर 50 प्रतिशत आयात शुल्क लागू रहने की स्थिति में भी भारत की विकास दर पर बड़ा असर नहीं पड़ा है। इसकी वजह यह है कि घरेलू मांग और निर्यात में सुधार ने इन नकारात्मक प्रभावों की भरपाई कर दी है। भारत के कुल वस्तु निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी करीब 12 प्रतिशत है।
आगे के वर्षों का विकास अनुमान क्या है?
विश्व बैंक के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की वृद्धि दर घटकर 6.5 प्रतिशत रह सकती है। हालांकि इसके बावजूद भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ने वाला देश बना रहेगा। वहीं वित्त वर्ष 2027-28 में विकास दर के फिर से बढ़कर 6.6 प्रतिशत होने की उम्मीद जताई गई है, जिसे सेवा क्षेत्र, निर्यात में सुधार और निवेश में तेजी से समर्थन मिलेगा।
ग्रामीण आय और कर सुधारों का असर
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में आर्थिक वृद्धि को मजबूत निजी उपभोग का सहारा मिल रहा है। इसका कारण हाल के कर सुधार और ग्रामीण क्षेत्रों में परिवारों की वास्तविक आय में सुधार है। विश्व बैंक ने जून में भारत की विकास दर 6.3 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था, जिसे अब बढ़ाकर 7.2 प्रतिशत कर दिया गया है।






