लखनऊ, 12 फरवरी 2026:
भारत-अमेरिका कृषि समझौते के विरोध में गुरुवार को लखनऊ के डीएम कार्यालय परिसर किसानों का आक्रोश फूट पड़ा। ‘मेरा खेत-मेरा अधिकार’ के नारे लगाते हुए भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के बैनर तले बड़ी संख्या में किसानों ने धरना-प्रदर्शन किया। किसानों का कहना था कि यह समझौता देश के छोटे और मझोले किसानों के हितों पर सीधा हमला है। इससे कृषि क्षेत्र में विदेशी कंपनियों का दबदबा बढ़ेगा।
धरना स्थल पर किसानों ने डीएम विशाख जी से मिलकर केंद्र सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के लिए ज्ञापन सौंपने की मांग की। प्रदर्शनकारी काफी देर तक डीएम कार्यालय परिसर में बैठे रहे। किसानों का कहना था कि वे गांवों से लंबी दूरी तय कर आए हैं और जब तक डीएम ज्ञापन नहीं लेंगे, वे वापस नहीं जाएंगे। बाद में एक प्रतिनिधिमंडल ने डीएम को ज्ञापन सौंपा, जिसमें भारत-अमेरिका कृषि समझौते को रद्द करने या उस पर पुनर्विचार करने की मांग की गई।

भाकियू नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि विदेशी कंपनियों को कृषि क्षेत्र में खुली छूट दी गई तो स्थानीय किसानों की जमीन, उपज और बाजार पर सीधा असर पड़ेगा। वक्ताओं ने कहा कि सस्ती विदेशी कृषि उपज के भारतीय बाजार में आने से स्थानीय किसान प्रतिस्पर्धा में टिक नहीं पाएंगे जिससे बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान होगा। प्रदर्शनकारियों ने यह भी आशंका जताई कि यह समझौता डेयरी सेक्टर पर सीधा आघात करेगा। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और खाद्य सुरक्षा व्यवस्था खतरे में पड़ सकती है।
धरनास्थल पर बीज और कृषि क्षेत्र में बढ़ते कॉरपोरेट नियंत्रण पर चिंता जताते हुए कहा गया कि इससे किसानों की स्वायत्तता समाप्त होगी और देश की कृषि आत्मनिर्भरता कमजोर पड़ेगी। भाकियू पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह सिर्फ लखनऊ की नहीं बल्कि देशभर के किसानों की चिंता है। किसानों ने प्रशासन के माध्यम से केंद्र सरकार को चेतावनी दी कि यदि किसान विरोधी समझौते को वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक, तेज और निर्णायक रूप दिया जाएगा।
प्रदर्शन में भाकियू के प्रदेश महासचिव गणेश शंकर वर्मा, जिलाध्यक्ष आलोक वर्मा, वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष सुनील शुक्ला, जिला महासचचिव आशीष यादव, महिला जिलाध्यक्ष उर्मिला मौर्य, मोहम्मद इमरान सहित कई पदाधिकारी और तमाम किसान मौजूद रहे।






