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गोरखपुर में वानिकी-औद्यानिकी विश्वविद्यालय को हरी झंडी, 491 करोड़ से बनेगा हरित शिक्षा का नया केंद्र

कैबिनेट बैठक में मिली मंजूरी, कैम्पियरगंज में 50 हेक्टेयर में होगा निर्माण, विश्वविद्यालय में शुरू होंगे सामाजिक वानिकी, कृषि वानिकी और औद्यानिकी से जुड़े डिग्री व डिप्लोमा कोर्स

लखनऊ, 7 अप्रैल 2026:

यूपी सरकार ने गोरखपुर को एक बड़ी शैक्षिक और पर्यावरणीय सौगात दी है। सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय की स्थापना को मंजूरी मिल गई। इसके लिए उत्तर प्रदेश वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय अध्यादेश-2026 के प्रख्यापन को मंजूरी दी गई है।

करीब 491 करोड़ रुपये की लागत से यह विश्वविद्यालय गोरखपुर के कैम्पियरगंज क्षेत्र में लगभग 50 हेक्टेयर भूमि पर स्थापित किया जाएगा। राज्य सरकार ने इस परियोजना के लिए चालू वित्तीय वर्ष के बजट में 50 करोड़ रुपये का प्रावधान भी पहले ही कर दिया है। विश्वविद्यालय गोरखपुर का पांचवां विश्वविद्यालय और उत्तर भारत का पहला वानिकी विश्वविद्यालय बनने जा रहा है।

इस संस्थान में वानिकी, औद्यानिकी, वन्यजीव संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, एग्रोफॉरेस्ट्री और बागवानी जैसे आधुनिक विषयों में बीएससी, एमएससी, पीएचडी और डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य वनावरण बढ़ाना, जैव विविधता संरक्षण को मजबूत करना और युवाओं को रोजगारोन्मुख शिक्षा उपलब्ध कराना है।

मालूम हो कि मुख्यमंत्री ने 6 सितंबर 2024 को कैम्पियरगंज में जटायु (रेड हेडेड वल्चर) संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र के उद्घाटन के दौरान उक्त विश्वविद्यालय खोलने की घोषणा की थी। उसी के पास विश्वविद्यालय के लिए भूमि भी चिन्हित की गई है। इसके साथ गोरखपुर वन प्रभाग ने प्रक्रियाएं तेज कर दी हैं।

प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) विकास यादव के अनुसार विश्वविद्यालय में सामाजिक वानिकी, कृषि वानिकी और औद्यानिकी से जुड़े डिग्री व डिप्लोमा कोर्स भी शुरू किए जाएंगे। इससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।

सरकार का मानना है कि इस विश्वविद्यालय से प्रदेश में हरित विकास, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन को नई दिशा मिलेगी। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब इसके शिलान्यास की तैयारियां तेज कर दी गई हैं।

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