लखनऊ, 28 जनवरी 2026:
उत्तर प्रदेश और जापान के बीच पर्यटन और संस्कृति के क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देने पर गंभीर मंथन हुआ। यह चर्चा यामानाशी प्रांत से आए जापानी प्रतिनिधिमंडल और उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच लखनऊ में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में हुई। बैठक की अध्यक्षता पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने की। इसमें वेलनेस टूरिज्म, गोल्फ जैसे खेल पर्यटन, खानपान, बौद्ध पर्यटन, सांस्कृतिक यात्राएं और साहित्य आधारित पर्यटन को सहयोग के प्रमुख क्षेत्र बताया गया।
संस्कृति बनी भारत-जापान साझेदारी की मजबूत कड़ी
बैठक को संबोधित करते हुए मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि भारत और जापान को संस्कृति और परंपराएं स्वाभाविक रूप से जोडती हैं। दोनों देशों के रिश्ते साझा जीवन मूल्यों, बौद्ध विरासत और अध्यात्म पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि आर्थिक सहयोग जरूरी है, लेकिन पर्यटन और संस्कृति लंबे समय तक चलने वाली साझेदारी की मजबूत नींव रखते हैं और लोगों को आपस में जोडते हैं।
बौद्ध विरासत में उत्तर प्रदेश की खास भूमिका
जयवीर सिंह ने कहा कि जापान ने उन्नीसवीं सदी में आधुनिक विकास की दिशा पकडी, वहीं आज भारत और उत्तर प्रदेश सहयोग के नए दौर में हैं। उन्होंने बताया कि बोधगया के साथ-साथ सारनाथ, कुशीनगर और कपिलवस्तु जैसे महत्वपूर्ण बौद्ध स्थल उत्तर प्रदेश में स्थित हैं। यह प्रदेश दुनिया का एकमात्र ऐसा क्षेत्र है जहां भगवान बुद्ध के जीवन से जुडे सभी प्रमुख स्थल एक ही राज्य में हैं। इसी क्रम में उन्होंने अप्रैल या मई में जापान में ‘यूपी फेस्टिवल’ आयोजित करने की संभावना भी जताई, जिससे जापानी जनता को उत्तर प्रदेश की संस्कृति और पर्यटन क्षमता से जोडा जा सके।
जापानी जीवन दर्शन और वेलनेस पर फोकस
पर्यटन और संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने जापान की जीवन दर्शन परंपराओं जैसे इकिगाई, वाबी-साबी, जेन और जाजेन का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दर्शन, वेलनेस और पर्यटन के क्षेत्र में आपसी अनुभव साझा करने से दोनों पक्षों को लाभ होगा। सारनाथ और कुशीनगर में जापानी बौद्ध संस्थानों की मौजूदगी भारत-जापान के पुराने आध्यात्मिक रिश्तों का प्रमाण है। उन्होंने पर्यटन और संस्कृति को दोनों देशों के स्थायी संबंधों का आधार बताया।
गोल्फ, व्यंजन और लर्निंग टूरिज्म के अवसर
अमृत अभिजात ने कहा कि होटल तक सीमित न रहकर व्यंजन आधारित अनुभव, खेल पर्यटन और लर्निंग टूरिज्म को भी बढावा देना होगा। उन्होंने बताया कि आगरा, लखनऊ और वाराणसी में उच्च गुणवत्ता वाले गोल्फ कोर्स मौजूद हैं, जो जापान की गोल्फ संस्कृति को देखते हुए नए अवसर खोलते हैं। साथ ही चिकित्सा पर्यटन, साहित्यिक आदान-प्रदान और विशेष रूप से तैयार किए गए जापानी टूर पैकेज पर भी जोर दिया गया।
अगस्त में आएगा 200 सदस्यों का जापानी प्रतिनिधिमंडल
यामानाशी प्रांत के उप राज्यपाल जुनिची इशिडेरा ने बताया कि दिसंबर 2024 में एमओयू के बाद से दोनों पक्षों के बीच लगातार संवाद हो रहा है। उन्होंने कहा कि यामानाशी प्रांत जापान में उत्तर प्रदेश के लिए प्रवेश द्वार की भूमिका निभाना चाहता है। अगस्त में लगभग 200 सदस्यों का जापानी प्रतिनिधिमंडल उत्तर प्रदेश आएगा, जिससे व्यापार, पर्यटन और सांस्कृतिक सहयोग को नई गति मिलेगी। प्रतिनिधिमंडल की वाराणसी समेत अन्य स्थलों की यात्रा केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और नीतिगत दृष्टि से भी महत्वपूर्ण होगी।






