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‘एक ट्रेड-एक टैक्स’ की व्यवस्था लागू करें… वित्त मंत्री से व्यापारियों की मांग, मिलेगी ये राहत

आम बजट 2026-27 से व्यापारियों को उम्मीदें, लखनऊ के व्यापारियों ने बैठक में टैक्स व्यवस्था को सरल, पारदर्शी और व्यापार-अनुकूल बनाने को लेकर किया विचार-विमर्श, वित्त मंत्री को कर सुधारों से संबंधित भेजा ज्ञापन

लखनऊ, 28 जनवरी 2026:

देश के आगामी आम बजट 2026-27 को लेकर व्यापारियों की उम्मीदें और अपेक्षाएं एक बार फिर सामने आई हैं। इसी क्रम में बुधवार को लखनऊ व्यापार मंडल के कार्यालय में व्यापारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। संगठन के अध्यक्ष अमरनाथ मिश्र की अगुवाई में हुई बैठक में कर व्यवस्था को सरल, पारदर्शी और व्यापार-अनुकूल बनाने को लेकर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।

अध्यक्ष अमरनाथ मिश्र ने बताया कि इससे पहले 7 जनवरी को सरोजनीनगर विधायक राजेश्वर सिंह के माध्यम से एवं ई-मेल द्वारा देश की वित्त मंत्री को कर सुधारों से संबंधित एक विस्तृत ज्ञापन भेजा गया था। बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया कि सरकार एक राष्ट्र-एक कर की भावना को आगे बढ़ाते हुए ‘एक ट्रेड-एक टैक्स’ की व्यवस्था लागू करे, जिससे व्यापारियों को जटिल कर संरचना से राहत मिल सके।

बैठक में व्यापारियों ने पार्टनरशिप फर्मों पर कर दरों के युक्तिकरण की मांग की ताकि छोटे एवं मध्यम व्यापारियों पर अनावश्यक कर बोझ कम हो सके। साथ ही जीएसटी पंजीकरण सीमा बढ़ाने की भी जोरदार मांग उठी। व्यापारियों का सुझाव है कि सेवाओं के लिए जीएसटी पंजीकरण सीमा ₹50 लाख और वस्तुओं के लिए ₹1 करोड़ की जाए।

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इसके अलावा टीडीएस व्यवस्था को सरल बनाते हुए केवल दो दरें 1 प्रतिशत और 5 प्रतिशत लागू करने की मांग की गई। पार्टनरशिप फर्मों में पार्टनर्स को दिए जाने वाले वेतन और पारिश्रमिक को पूरी तरह खर्च के रूप में मान्यता देने, एक ही वस्तु पर समान कर दर होने की स्थिति में केवल एक ही HSN कोड रखने जैसे सुझाव भी रखे गए।

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व्यापारियों ने जीएसटी पोर्टल की तकनीकी खामियों को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि पोर्टल की त्रुटियों के कारण छोटे व्यापारियों पर अनावश्यक पेनल्टी और ब्याज का बोझ डाला जाता है, जो अन्यायपूर्ण है। जीएसटी अधिनियम की धारा 9(3) से जुड़े जटिल प्रावधानों को समाप्त करने और जहाँ इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के कारण आईटीसी फँस जाता है, वहाँ ऑटोमेटिक आईटीसी रिफंड की व्यवस्था करने की मांग भी की गई।

वरिष्ठ महामंत्री पवन मनोचा ने कहा कि यदि व्यापारियों के इन सुझावों को बजट में शामिल किया जाता है, तो कर प्रणाली सरल होगी, अनुपालन का बोझ घटेगा और छोटे व मध्यम व्यापारियों को वास्तविक राहत मिलेगी। वहीं कोषाध्यक्ष देवेंद्र गुप्ता ने ऑनलाइन व्यापार (ई-कॉमर्स) पर संतुलित कर या विशेष लेवी लगाने की मांग की, ताकि स्थानीय व्यापारियों को समान प्रतिस्पर्धा का अवसर मिल सके। साथ ही कमर्शियल लोन की ब्याज दर घटाकर 5 प्रतिशत करने की भी मांग रखी गई।

बैठक में सोने-चांदी की लगातार बढ़ती कीमतों पर भी चिंता व्यक्त की गई। व्यापारियों ने कहा कि कीमती धातुओं के दाम बढ़ने से छोटे ज्वेलर्स और खुदरा व्यापारी सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। इसके लिए कम ब्याज दर पर ऋण सुविधा और नीतिगत स्थिरता सुनिश्चित करने की मांग की गई।

बैठक में चेयरमैन राजेंद्र कुमार अग्रवाल, सतीश अग्रवाल, अशोक मोतियानी, भारत भूषण गुप्ता, अरुण अवस्थी, नसीम अंसारी, सुमित गुप्ता, प्रियंक गुप्ता सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी और व्यापारी उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि बजट ऐसा होना चाहिए जो व्यापार, रोजगार और बाजार की मजबूती तीनों को साथ लेकर चले।

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