बिजनेस डेस्क, 28 मार्च 2026:
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करने के लिए रूस के साथ सहयोग और मजबूत कर लिया है। कच्चे तेल के साथ अब एलएनजी (लिक्विड नेचुरल गैस) आयात को लेकर भी दोनों देशों के बीच सहमति बन गई है। सरकार की योजना है कि देश की करीब 40 फीसदी ऊर्जा जरूरत रूस से पूरी की जाए।
अमेरिका की ओर से प्रतिबंधों में मिली ढील के बाद भारत ने इस मौके का फायदा उठाते हुए रूस से आयात बढ़ाने का फैसला किया है। इसके साथ ही ईरान से भी तेल और गैस आयात की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं, ताकि आपूर्ति में कोई रुकावट न आए।
मौजूदा हालात में रूस कई मोर्चों पर भारत के काम आ सकता है। रूस के ईरान से करीबी रिश्तों का फायदा भारत को कूटनीतिक स्तर पर भी मिलेगा। खासकर होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका के बीच यह सहयोग अहम माना जा रहा है।
एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि रूस के साथ होने वाला व्यापार रुपया-रूबल में होगा। इससे डॉलर पर निर्भरता घटेगी और भुगतान प्रक्रिया भी आसान बनेगी। अब तक यूक्रेन युद्ध के बाद भारत रूस से करीब 44 अरब डॉलर का कच्चा तेल खरीद चुका है। सरकार का मानना है कि मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए ऊर्जा आपूर्ति के अलग-अलग स्रोत बनाए रखना जरूरी है, ताकि किसी एक क्षेत्र में संकट का सीधा असर देश पर न पड़े।






