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भारत-नेपाल मैत्री महोत्सव में बिखरे संस्कृति के रंग…रिश्तों में मिठास घोल गए लोक नृत्य

पूर्वांचल और तराई में सजा दोस्ती का मंच, डिजिटल दौर की युवा पीढ़ी परंपरा से जुड़ती नजर आई

लखनऊ, 20 फरवरी 2026:

भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और सामाजिक रिश्तों को नई पहचान देता भारत-नेपाल मैत्री महोत्सव 2026 इन दिनों पूर्वांचल और तराई के इलाकों में उत्सव का माहौल बना रहा है। 16 फरवरी से शुरू हुआ यह आयोजन अब अपने मध्य चरण में पहुंच चुका है और दोनों देशों के कलाकारों की प्रस्तुतियां लोगों को खूब आकर्षित कर रही हैं।

लोक संस्कृति की झलक से सजे कार्यक्रमों में झगड़ जनजाति नृत्य, कुमारी नृत्य, फरुवाही और बधावा लोक नृत्य ने दर्शकों का दिल जीत लिया। प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि यह महोत्सव सिर्फ सांस्कृतिक आयोजन नहीं बल्कि भारत और नेपाल के रिश्तों को और मजबूत करने की पहल है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों का जुड़ाव केवल कूटनीति तक सीमित नहीं, बल्कि धर्म, परंपरा और भावनाओं से भी गहराई से जुड़ा है।

Indo-Nepal Friendship Festival Celebrate Cultural Unity (1)

महोत्सव पूर्वांचल और तराई के आठ जिलों में आयोजित हो रहा है, जहां एक जनपद एक उत्पाद (ओडीओपी) प्रदर्शनी भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ-साथ रचनात्मक गतिविधियों ने भी खास रंग जमाया। स्काउट एंड गाइड के बच्चों ने योग प्रदर्शन किया, वहीं भारत-नेपाल मैत्री विषय पर चित्रकला और रंगोली प्रतियोगिताओं ने युवाओं की भागीदारी बढ़ाई। नेपाल से आए कलाकारों की प्रस्तुतियों ने माहौल को ऐसा बना दिया कि मंच पर दोस्ती और अपनापन साफ महसूस होने लगा।

मंत्री ने कहा कि डिजिटल दौर में पली-बढ़ी नई पीढ़ी जब अपनी जड़ों से जुड़ती है तो संस्कृति का असली रंग सामने आता है। उनके मुताबिक यह महोत्सव युवाओं को अपनी पहचान और परंपराओं से जोड़ने का काम कर रहा है, जिससे भारत-नेपाल की दोस्ती और मजबूत हो रही है। कुशीनगर, सिद्धार्थनगर, महाराजगंज, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी और पीलीभीत में चल रहे कार्यक्रमों में धोबिया लोकनृत्य और नुक्कड़ नाटकों ने खास असर छोड़ा।

कलाकारों ने मंच के जरिए दोनों देशों के ‘रोटी-बेटी’ रिश्ते को जीवंत रूप में पेश किया, जिसे देखकर दर्शक भावुक भी हुए और उत्साहित भी। 28 फरवरी तक चलने वाला यह महोत्सव सांस्कृतिक एकता, पर्यटन बढ़ावा और लोगों के बीच आपसी जुड़ाव का बड़ा मंच बनकर उभर रहा है।

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