न्यूज डेस्क, 21 मार्च 2026:
अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया है। इस संघर्ष का सबसे बड़ा असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है। खासकर होर्मुज स्ट्रेट के बाधित होने से तेल और गैस की सप्लाई चेन में गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। दुनिया के बड़े हिस्से की ऊर्जा निर्भरता इस समुद्री मार्ग पर होने के कारण स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है।
इसी बीच ईरान ने कुछ नरमी के संकेत दिए हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने जापानी मीडिया से बातचीत में कहा है कि जापान से जुड़े जहाजों को ईरान होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति देने पर विचार कर रहा है। इसके लिए दोनों देशों के बीच बातचीत भी शुरू हो चुकी है। हालांकि जापान सरकार ने इस पर सतर्क प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि पाबंदी हटाने का सबसे प्रभावी तरीका ईरान से सीधी बातचीत ही है और अमेरिका को उकसाने से बचना होगा।
जापानी अधिकारियों का मानना है कि भले ही उनके जहाजों को अनुमति मिल जाए लेकिन इससे वैश्विक ऊर्जा संकट का समाधान नहीं होगा। वहीं, ईरान के इस कदम को रणनीतिक नरमी के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि हालिया हमलों के बावजूद उसने सीमित संख्या में जहाजों को गुजरने दिया है। शिपिंग डेटा के अनुसार 15-16 मार्च के बीच कम से कम छह जहाजों ने खुमैनी पोर्ट पर माल उतारा और सुरक्षित पारगमन किया।
उधर, संयुक्त राष्ट्र ने भी स्थिति को सामान्य करने के प्रयास तेज कर दिए हैं। महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने कहा है कि संगठन होर्मुज क्षेत्र को फिर से सुरक्षित और खुला बनाने के लिए मध्यस्थता को तैयार है। उन्होंने 2022 के ब्लैक सी समझौते का उदाहरण देते हुए उम्मीद जताई कि इसी तरह का समाधान यहां भी निकाला जा सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें इस अहम समुद्री मार्ग पर टिकी हुई हैं।






