Uttar Pradesh

जैन सर्किट को मिलेगी नई पहचान…भगवान चन्द्रप्रभु की जन्मस्थली पर तैयार हो रहा नया घाट

शांत, आधुनिक व इको-फ्रेंडली होगा आध्यात्मिक ठिकाना, 17.06 करोड़ की परियोजना अंतिम चरण में, भगवान चंद्रप्रभु की जन्मस्थली को मिलेगा आकर्षक रूप

लखनऊ/वाराणसी, 22 मार्च 2026:

वाराणसी के पारंपरिक घाटों की भीड़ और रौनक से अलग अब एक नया ठिकाना उभरने वाला है, जो शांति, आध्यात्म और विरासत का अनोखा मेल पेश करेगा। जैन धर्म के 8वें तीर्थंकर भगवान चंद्रप्रभु से जुड़े गंगा किनारे बसे चंद्रावती गांव में तैयार हो रहा नया घाट अब लगभग पूरा हो चुका है और जल्द ही आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा।

उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग जैन सर्किट के तहत यहां 17.06 करोड़ रुपये की लागत से एक तीन-स्तरीय, आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल घाट विकसित कर रहा है। करीब 200 मीटर लंबा यह घाट न केवल एक नया पर्यटन केंद्र बनेगा, बल्कि जैन धर्म से जुड़े लोगों के लिए भी खास महत्व रखेगा। पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह का कहना है कि यह परियोजना सिर्फ एक घाट का निर्माण नहीं है, बल्कि यह उन जगहों को पहचान दिलाने की कोशिश है, जो अब तक लोगों की नजर से दूर थीं। उनके मुताबिक, सरकार की योजना है कि ऐसे धार्मिक स्थलों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमोट किया जाए, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग यहां तक पहुंच सकें।

काशी के घाटों से अलग एक सुकून भरा विकल्प

वाराणसी अपने घाटों के लिए दुनिया भर में मशहूर है, लेकिन चंद्रावती घाट इस पहचान को एक नया विस्तार देगा। शहर के मुख्य घाटों पर जहां हर समय भीड़ रहती है, वहीं यह घाट अपेक्षाकृत शांत माहौल देगा, जो सुकून और ध्यान की तलाश करने वालों के लिए खास होगा। करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित यह इलाका अब तक पर्यटन के नक्शे पर ज्यादा चर्चा में नहीं था, लेकिन नए घाट के तैयार होने के बाद यहां पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने की पूरी उम्मीद है। इससे स्थानीय लोगों को भी रोजगार और कारोबार के नए मौके मिलेंगे।

जैन समाज की आस्था से जुड़ा है गहरा रिश्ता

चंद्रावती सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि जैन धर्मावलंबियों के लिए बेहद पवित्र स्थल है। यह जैन धर्म के 8वें तीर्थंकर भगवान चंद्रप्रभु की जन्मस्थली मानी जाती है। यह वही स्थान है जहां उनके जीवन से जुड़े चार अहम पड़ाव च्यवन, जन्म, दीक्षा और केवलज्ञान से जुड़ी मान्यताएं प्रचलित हैं। यहां मौजूद प्राचीन मंदिर करीब 500 साल से ज्यादा पुराना बताया जाता है, जो इस क्षेत्र की ऐतिहासिक और धार्मिक अहमियत को और मजबूत करता है।

जैन ग्रंथों के मुताबिक भगवान चंद्रप्रभु का जन्म राजा महासेन और रानी लक्ष्मणा देवी के यहां हुआ था। कहा जाता है कि उन्होंने गंगा किनारे नाग वृक्ष के नीचे तपस्या कर केवलज्ञान हासिल किया था। ऐसे में यह पूरा इलाका श्रद्धा और आस्था का केंद्र बना हुआ है।

तीन-स्तरीय घाट में दिखेगा आधुनिक डिजाइन और परंपरा का मेल

इस घाट को खास तौर पर तीन स्तरों में तैयार किया गया है, जिससे अलग-अलग मौसम और जलस्तर के हिसाब से इसका इस्तेमाल किया जा सके।
परियोजना से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, घाट का संरचनात्मक काम लगभग पूरा हो चुका है। पहले और दूसरे स्तर पूरी तरह तैयार हैं, जबकि तीसरे स्तर का प्लेटफॉर्म भी बन चुका है। अब सिर्फ फिनिशिंग से जुड़े कुछ काम बाकी हैं, जैसे फ्लोरिंग और रेलिंग, जिन्हें जैन श्वेतांबर तीर्थ सोसायटी की ओर से पूरा कराया जाएगा। घाट की बनावट ऐसी रखी गई है कि यह पारंपरिक शैली को भी बनाए रखे और आधुनिक सुविधाओं से भी लैस हो। यही संतुलन इसे खास बनाता है।

Jain Circuit Transformation New Ghat Unveiled (1)

कटाव से सुरक्षा और पर्यावरण का खास ख्याल

इस परियोजना की एक बड़ी खासियत इसका इको-फ्रेंडली होना है। घाट को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह गंगा किनारे होने वाले कटाव से मंदिर और आसपास के क्षेत्र को सुरक्षित रख सके। इसके साथ ही यह निर्माण गंगा के पानी को मंदिर परिसर में घुसने से भी रोकता है, जिससे धार्मिक स्थल सुरक्षित रहता है। घाट के निर्माण में गैबियन संरचना जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जो कम कार्बन फुटप्रिंट के साथ तैयार होती है। इससे न केवल पर्यावरण पर असर कम पड़ता है, बल्कि भू-जल संतुलन भी बना रहता है। इस पहल से विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाने का मकसद पूरा होगा।

इन सुविधाओं से लैस होगा नया घाट

पर्यटकों और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस घाट पर कई आधुनिक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। गंगा तक आसानी से पहुंचने के लिए चौड़ी और सुरक्षित सीढ़ियां बनाई गई हैं। इसके अलावा शौचालय, पोर्टेबल चेंजिंग रूम, साइनेज और पार्किंग जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। घाट पर हेरिटेज लाइटिंग की व्यवस्था की गई है, जिससे शाम के समय इसकी खूबसूरती और निखरकर सामने आएगी। पत्थर की बेंच, जालीदार रेलिंग और हरित क्षेत्र इस पूरे परिसर को और आकर्षक बना रहे हैं। कोशिश यही है कि यहां आने वाले लोगों को एक सुकून भरा और व्यवस्थित अनुभव मिले।

जैन सर्किट को मिलेगा बड़ा बढ़ावा, पर्यटन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी की उम्मीद

पर्यटन और संस्कृति विभाग इस परियोजना को जैन सर्किट के विस्तार की दिशा में एक अहम कदम मान रहा है। चंद्रावती घाट के तैयार होने से जैन धर्म से जुड़े अन्य स्थलों को भी एक नेटवर्क के रूप में जोड़ा जा सकेगा। पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि वाराणसी में पर्यटन लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2025 में यहां 17.30 करोड़ से ज्यादा पर्यटकों के आने का आंकड़ा दर्ज किया गया, जो शहर की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है। ऐसे में चंद्रावती घाट जैसे नए स्थल इस बढ़ते दबाव को भी संतुलित करेंगे और पर्यटकों को नए विकल्प देंगे। खासतौर पर जैन धर्म से जुड़े लोग इस स्थान को अपनी यात्रा में शामिल कर सकते हैं। आने वाले समय में यह घाट न सिर्फ धार्मिक पर्यटन, बल्कि सांस्कृतिक और शांति आधारित पर्यटन का भी केंद्र बन सकता है।

स्थानीय लोगों के लिए भी नया अवसर

इस परियोजना का असर सिर्फ पर्यटन तक सीमित नहीं रहेगा। चंद्रावती और आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों के लिए भी यह बड़ा मौका लेकर आएगा। पर्यटकों की संख्या बढ़ने से यहां छोटे व्यापार, गाइड सेवा, ठहरने की सुविधा और स्थानीय उत्पादों की मांग बढ़ेगी। इससे इलाके की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।

आध्यात्मिकता व विकास का संतुलित मॉडल

चंद्रावती घाट की पूरी परियोजना एक ऐसे मॉडल के तौर पर देखी जा रही है, जहां आस्था, विरासत और आधुनिक विकास एक साथ नजर आते हैं। यह सिर्फ एक घाट नहीं, बल्कि एक सोच का हिस्सा है, जिसमें उन जगहों को सामने लाने की कोशिश है, जो ऐतिहासिक और धार्मिक रूप से समृद्ध हैं, लेकिन अब तक चर्चा में नहीं आ पाए। सरकार का फोकस अब बड़े शहरों के साथ-साथ ऐसे शांत और कम भीड़ वाले स्थलों को भी विकसित करने पर है, ताकि पर्यटन का दायरा और व्यापक हो सके।

जल्द खुलेगा नया आध्यात्मिक ठिकाना

करीब 99 प्रतिशत काम पूरा होने के बाद अब चंद्रावती घाट के खुलने का इंतजार है। जैसे ही बाकी फिनिशिंग का काम पूरा होगा, यह घाट श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए खोल दिया जाएगा। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में यह जगह वाराणसी के पर्यटन नक्शे पर अपनी अलग पहचान बनाएगी और जैन सर्किट को नई मजबूती देगी।

चंद्रावती घाट की खास बातों पर एक नजर

यह घाट जैन धर्म के 8वें तीर्थंकर भगवान चंद्रप्रभु की जन्मस्थली से जुड़ा है। तीन-स्तरीय आधुनिक डिजाइन इसे अलग बनाता है। इको-फ्रेंडली निर्माण और कम कार्बन तकनीक का इस्तेमाल हुआ है। कटाव से सुरक्षा और मंदिर संरक्षण का ध्यान रखा गया है। पर्यटकों के लिए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। जैन सर्किट के विस्तार में अहम भूमिका निभाएगा

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