लखनऊ, 5 जनवरी 2026:
उत्तर प्रदेश सरकार सामाजिक न्याय और समान अवसर की दिशा में लगातार ठोस कदम उठा रही है। सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार का लक्ष्य है कि आर्थिक कमजोरी किसी भी प्रतिभा के रास्ते में बाधा न बने। जौनपुर की पूजा सिंह की सफलता इसी सोच को जमीन पर साकार करती है। एक किसान परिवार से आने वाली पूजा ने मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के जरिए असिस्टेंट कमांडेंट बनकर यह मुकाम हासिल किया, जिसे कभी वह सिर्फ सपना मानती थीं। पूजा खुद मानती हैं कि इस योजना ने उनके सपनों को नई दिशा दी।
पूजा सिंह के पिता खेती कर परिवार का भरण पोषण करते हैं और सीमित आय में घर चलता है। बचपन से ही पूजा ने अभावों को नजदीक से देखा, लेकिन इन हालात ने उन्हें कमजोर नहीं बल्कि और मजबूत बनाया। उन्होंने ठान लिया था कि शिक्षा के बल पर वह अपना और अपने परिवार का भविष्य बदलेंगी। पूजा ने 12वीं तक की पढ़ाई दिल्ली से की, लेकिन आर्थिक दबाव के चलते महानगर में आगे पढ़ाई जारी रखना संभव नहीं हो सका। इसके बाद वह जौनपुर लौटीं और टीडी कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की।
साल 2024 में पूजा को मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना की जानकारी मिली। मई 2024 में आवेदन करने के बाद जून 2024 से वह योजना के अंतर्गत मुफ्त कोचिंग से जुड़ गईं। इस योजना के तहत उन्हें अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन, नियमित कक्षाएं और सुव्यवस्थित पाठ्यक्रम मिला। पूजा रोज कॉलेज के बाद करीब डेढ़ घंटे की कक्षाओं में शामिल होती थीं। वह बताती हैं कि निजी कोचिंग में पढ़ाई करने पर 1 से 1.50 लाख रुपये तक खर्च आता, जो उनके परिवार के लिए असंभव था। अभ्युदय योजना ने यह पूरा आर्थिक बोझ खत्म कर दिया।
योजना के तहत मिली मजबूत तैयारी और निरंतर अभ्यास का नतीजा यह रहा कि पूजा सिंह ने अपने पहले ही प्रयास में यूपीएससी सीएपीएफ परीक्षा पास कर ली और असिस्टेंट कमांडेंट बनीं। उनकी यह उपलब्धि सिर्फ व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार की शिक्षा और सामाजिक उत्थान की नीतियों की भी पुष्टि करती है। पूजा की सफलता से उनके परिवार, गांव और पूरे क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल है।
पूजा सिंह का कहना है कि मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना उन हजारों युवाओं के लिए उम्मीद की किरण है, जो संसाधनों की कमी के कारण अपने सपनों को अधूरा छोड़ देते हैं। समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित यह योजना आईएएस, पीसीएस, नीट, जेईई और सीएपीएफ जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को गांव और कस्बों तक पहुंचा रही है। पूजा की कहानी यह साबित करती है कि सही मार्गदर्शन और सरकारी सहयोग से हर सपना साकार हो सकता है।






