लखनऊ, 8 फरवरी 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ के ऐतिहासिक चौक क्षेत्र में स्थित प्राचीन कोनेश्वर महादेव मंदिर अब अपने गौरवशाली अतीत के साथ आधुनिक सुविधाओं की नई पहचान गढ़ने जा रहा है। सदियों पुरानी मान्यताओं और विशिष्ट शिवलिंग की परंपरा को केंद्र में रखते हुए प्रदेश का पर्यटन विभाग मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण और पर्यटन विकास पर एक करोड़ रुपये खर्च करेगा। यह पहल योगी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल धार्मिक-पर्यटन स्थलों के उन्नयन की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार कोनेश्वर महादेव मंदिर रामायण कालीन मान्यताओं से जुड़ा है। मान्यता है कि माता सीता को वन में छोड़कर लौटते समय शोकाकुल लक्ष्मण गोमती नदी के तट पर स्थित कौण्डिन्य ऋषि के आश्रम में ठहरे थे। ऋषि के निर्देश पर लक्ष्मण ने यहां स्थापित शिवलिंग का अभिषेक किया। वाल्मीकि कृत रामायण में वर्णित इस कथा के कारण आश्रम में स्थापित शिवलिंग ‘कौण्डिन्येश्वर महादेव’ कहलाया। यह बाद में कोनेश्वर महादेव के नाम से प्रसिद्ध हुआ। मंदिर के कोने में स्थित शिवलिंग इसकी विशिष्ट पहचान है।
परिसर में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आधुनिक प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छ शौचालय, पेयजल सुविधा और विश्राम स्थल विकसित किए जाएंगे। सावन के महीने में यहां शिवभक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। ऐसे में व्यवस्थाओं के सुदृढ़ होने से दर्शन-व्यवस्था सुगम होगी। मंदिर तक पहुंचना भी आसान है। चारबाग रेलवे स्टेशन से ऑटो, कैब और सिटी बस के जरिए श्रद्धालु सहजता से पहुंच सकते हैं।
लखनऊ की पहचान अब धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक विरासत और अवधी व्यंजनों की त्रिवेणी से और प्रखर हो रही है। पर्यटन विभाग के सतत प्रयासों के चलते यूनेस्को द्वारा लखनऊ को हाल ही में ‘क्रिएटिव सिटी ऑफ गैस्ट्रोनॉमी’ का दर्जा मिला है। बेहतर कनेक्टिविटी, विकसित सुविधाओं और सुव्यवस्थित प्रबंधन के परिणामस्वरूप वर्ष 2025 में शहर में करीब 1.5 करोड़ पर्यटकों का आगमन दर्ज किया गया। इनमें बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक शामिल रहे। कोनेश्वर महादेव मंदिर का यह नवविकास लखनऊ की सांस्कृतिक-आध्यात्मिक यात्रा को नई ऊंचाई देगा।






