लखनऊ, 7 फरवरी 2026:
लखनऊ प्रीमियर लीग (एलपीएल) के ऑक्शन के बाद यूपी की राजधानी लखनऊ में क्रिकेट को लेकर हंगामा मच गया है। एलपीएल की चयन प्रक्रिया पर गंभीर आरोप लगाते हुए क्रिकेट प्लेयर एसोसिएशन से जुड़े खिलाड़ियों ने शनिवार को जोरदार प्रदर्शन किया। खिलाड़ियों ने क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ लखनऊ (सीएलए) के कार्यालय का घेराव कर चयन में अनियमितता और पक्षपात के आरोप लगाए।
प्रदर्शन के दौरान जब खिलाड़ी गोमतीनगर में बीबीडी बैडमिंटन एकेडमी परिसर स्थित सीएलए का कार्यालय पहुंचे तो वहां का मुख्य गेट बंद कर दिया गया। इससे नाराज खिलाड़ियों ने एसोसिएशन के पदाधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने लखनऊ क्रिकेट एसोसिएशन के वरिष्ठ पदाधिकारी एवं रिटायर्ड आईएएस अधिकारी नवनीत सहगल, खलीक अहमद सहित अन्य अधिकारियों पर गंभीर सवाल खड़े किए।
खिलाड़ियों का आरोप है कि लखनऊ प्रीमियर लीग में स्थानीय और मेहनती खिलाड़ियों को नजरअंदाज कर दूसरे जिलों के खिलाड़ियों को तरजीह दी गई है। उनका कहना है कि एलपीएल जैसे टूर्नामेंट का उद्देश्य लखनऊ की क्रिकेट प्रतिभाओं को मंच देना होना चाहिए लेकिन ऑक्शन में इसका उलटा हुआ। प्रदर्शन कर रहे खिलाड़ियों ने मांग की कि दूसरे जनपदों के 55 खिलाड़ियों को तत्काल लीग से बाहर किया जाए।

खिलाड़ियों ने यह भी कहा कि क्रिकेट एसोसिएशन लखनऊ की लीग ‘एबीसी’ में लगातार शानदार प्रदर्शन करने वाले प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को एलपीएल में मौका मिलना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने एलपीएल के पूरे चयन प्रक्रिया और ऑक्शन को रद्द कर दोबारा कराने की मांग उठाई। खिलाड़ियों की प्रमुख मांगों में हर फ्रेंचाइजी को 18 से 20 खिलाड़ियों को रखने की अनुमति, एक टीम में दूसरे जिलों के अधिकतम दो खिलाड़ियों की सीमा तय करना और पिछले तीन वर्षों से सीएलए लीग में भाग ले रहे खिलाड़ियों को ही एलपीएल में खेलने का अधिकार देना शामिल है।
प्रदर्शनकारी खिलाड़ियों ने सीएलए को 10 दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि 17 फरवरी तक उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे और लखनऊ प्रीमियर लीग का आयोजन नहीं होने देंगे। इसके साथ ही क्रिकेट एसोसिएशन लखनऊ में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच की मांग ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है। अब सबकी नजरें सीएलए के अगले कदम पर टिकी हैं।






