लखनऊ, 28 फरवरी 2026:
लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर स्थित ऐतिहासिक लाल बारादरी को रमजान के दौरान सील किए जाने के खिलाफ छात्र संगठनों का विरोध तेज होता जा रहा है। शनिवार को लखनऊ में संयुक्त छात्र मोर्चा के बैनर तले प्रेस कॉन्फ्रेंस में छात्र नेताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर मनमानी और पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाते हुए रजिस्ट्रार डॉ. भावना मिश्रा के तत्काल इस्तीफे और उनके विरुद्ध केस दर्ज करने की मांग की।
आइसा के समर, एनएसयूआई के अहमद रजा खान और एससीएस के महेंद्र यादव का कहना है कि लगभग 200 वर्ष पुरानी बारादरी में दशकों से मुस्लिम छात्र, कर्मचारी और शिक्षक नमाज अदा करते रहे हैं। 22 फरवरी को बिना किसी लिखित कार्यपालक आदेश या सार्वजनिक सूचना के गेट वेल्ड कर संरचना को बंद कर दिया गया। चारों ओर फेंसिंग कर दी गई। छात्रों के अनुसार इस तरह की कार्रवाई सीधे तौर पर साम्प्रदायिक तनाव को बढ़ाने वाली है। प्रशासन ने संरचना की स्थिति ठीक नहीं होने का दावा किया लेकिन कोई वैज्ञानिक निरीक्षण रिपोर्ट या तकनीकी आकलन सार्वजनिक नहीं किया गया।
छात्र नेताओं ने यह भी सवाल उठाया कि जब संरक्षण व रखरखाव के लिए 5 करोड़ रुपये स्वीकृत हैं तो उनके उपयोग का विवरण क्यों नहीं जारी किया गया। उनका आरोप है कि खतरे का दावा बिना प्रमाण के किया गया और वित्तीय जवाबदेही से बचा गया। 48 घंटे तक लिखित आदेश और निरीक्षण रिपोर्ट मांगने के बावजूद संवाद के बजाय पुलिस की तैनाती की गई और कई छात्रों पर मुकदमे दर्ज किए गए। वहीं, बाहरी साम्प्रदायिक तत्वों की परिसर में मौजूदगी पर प्रशासन की चुप्पी पर भी सवाल उठे।
छात्र नेताओं ने इस प्रकरण को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में छात्र नेताओं पर हुई कार्रवाई से जोड़ते हुए कहा कि देशभर में छात्र असहमति का अपराधीकरण बढ़ रहा है। 26 फरवरी को राज्यपाल को ज्ञापन देने निकाले गए शांतिपूर्ण मार्च को पुलिस द्वारा रोके जाने को भी उन्होंने अलोकतांत्रिक बताया। 23 फरवरी की बैठक में रजिस्ट्रार द्वारा स्वयं को सक्षम प्राधिकारी नहीं बताने पर छात्रों ने पूछा कि फिर वेल्डिंग और फेंसिंग का आदेश किसने दिया।
छात्र संगठनों ने मांग की कि लाल बारादरी को सील करने का लिखित आदेश और स्वतंत्र संरचनात्मक निरीक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। प्रधानमंत्री-उषा योजना की राशि का विस्तृत लेखा-जोखा दिया जाए। छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस हों और विश्वविद्यालयों में यूजीसी इक्विटी रेगुलेशंस 2026 को लागू किया जाए। साथ ही, छात्र प्रतिनिधियों को शामिल कर स्वतंत्र समीक्षा समिति गठित करने और तात्कालिक खतरा सिद्ध न होने पर सुरक्षा उपायों के साथ बारादरी पुनः खोलने की मांग भी दोहराई गई।






