लखनऊ, 3 जनवरी 2026:
यूपी अब केवल आबादी और कृषि का राज्य नहीं रहा बल्कि तेजी से देश के प्रमुख तकनीकी और डिजिटल केंद्र के रूप में उभर रहा है। इसी कड़ी में योगी सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में शामिल लखनऊ में प्रस्तावित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) सिटी को विकास की अगली बड़ी छलांग माना जा रहा है। सीएम योगी ने जनता के नाम अपने पत्र में भी इस परियोजना के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को स्पष्ट किया है।
एआई सिटी को दो चरणों और दो स्पष्ट जोनों में विकसित किया जाएगा। कुल क्षेत्रफल का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा कोर जोन होगा। इसमें एआई इनोवेशन सेंटर, अत्याधुनिक टेक पार्क, रिसर्च लैब्स और हाई एंड टेक्नोलॉजी सुविधाएं स्थापित की जाएंगी। शेष 40 प्रतिशत क्षेत्र में रेजिडेंशियल, कामर्शियल और सामाजिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा। इससे यह क्षेत्र एक आत्मनिर्भर और स्मार्ट टेक टाउनशिप के रूप में आकार ले सके।
योगी सरकार का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए आईटी-आईटीईएस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेक्टर को ग्रोथ इंजन के रूप में स्थापित किया जा रहा है। इसी रणनीति के तहत एआई सिटी को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर विकसित करने की योजना बनाई गई है जिससे सरकारी सहयोग और निजी निवेश के बीच संतुलित ढांचा तैयार हो सके।
लखनऊ की एआई सिटी को एक समर्पित और आत्मनिर्भर टेक हब के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां अत्याधुनिक डेटा सेंटर्स, हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, एआई रिसर्च लैब्स, स्टार्टअप इनक्यूबेशन सेंटर और ग्लोबल टेक कंपनियों के लिए आधुनिक वर्कस्पेस उपलब्ध होंगे। इसका उद्देश्य भारतीय और अंतरराष्ट्रीय एआई कंपनियों को एक ही स्थान पर विश्वस्तरीय सुविधाएं प्रदान करना है, ताकि वे तेजी से अपने प्रोजेक्ट्स को विकसित और विस्तार दे सकें।
यह परियोजना लखनऊ को टॉप-20 ग्लोबल एआई हब्स में शामिल करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है। राजधानी होने के साथ-साथ लखनऊ की शैक्षणिक ताकत इसे और मजबूत बनाती है। आईआईएम लखनऊ और आईआईआईटी लखनऊ जैसे प्रतिष्ठित संस्थान पहले से ही यहां मौजूद हैं। ये रिसर्च, इनोवेशन और स्किल डेवलपमेंट में अहम भूमिका निभा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि एआई सिटी इन संस्थानों के साथ मिलकर एक मजबूत टैलेंट पूल तैयार करेगी।
एआई सिटी से हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। आईटी प्रोफेशनल्स, डेटा साइंटिस्ट्स, इंजीनियर्स, रिसर्चर्स और स्टार्टअप उद्यमियों के लिए यह एक बड़ा मंच बनेगा। साथ ही स्थानीय युवाओं को रोजगार के लिए प्रदेश से बाहर नहीं जाना पड़ेगा। खास बात यह है कि एआई सिटी को ग्रीन और सस्टेनेबल डेवलपमेंट मॉडल पर विकसित किया जाएगा, जिससे तकनीकी विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण भी सुनिश्चित हो सकेगा।






