लखनऊ में बॉन्डेड डॉक्टरों का अनोखा प्रदर्शन : हाथ जोड़कर पुलिस से लगाई गुहार, सड़क पर बैठे तो जमीन पर बैठ गए ACP
कई हफ्ते से वेतन में समानता के मुद्दे पर आंदोलन कर रहे MBBS डॉक्टरों को 1090 चौराहे पर पुलिस ने रोका, बोले- डिप्टी सीएम के 24 घंटे में शासनादेश जारी करने के आश्वासन के बावजूद नहीं हुआ समाधान, अब एरियर के साथ चाहिए ‘वन बॉन्ड, वन सैलरी’

लखनऊ, 15 अक्टूबर 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ में वेतन में असमानता के खिलाफ आंदोलन कर रहे बॉन्डेड डॉक्टरों का गुस्सा गुरुवार को एक बार फिर सड़कों पर नजर आया। एप्रन पहने और मुंह पर टेप लगाए डॉक्टर लोहिया पथ पर पहुंचे और पुलिस के सामने हाथ जोड़कर अपनी मांगों को लेकर गुहार लगाते दिखे। कई हफ्ते से आंदोलन कर रहे इन डॉक्टरों का कहना है कि बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद उनकी मांगों पर अब तक कोई ठोस फैसला नहीं हुआ है।
प्रदर्शनकारी डॉक्टर 1090 चौराहे से मानव श्रृंखला बनाकर मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने लगे तो पुलिस ने उन्हें रोक दिया। डॉक्टर सड़क पर बैठने लगे तो एसीपी भी जमीन पर बैठ गए और हाथ जोड़कर उनसे धरना खत्म करने की अपील की। इस दौरान पुलिस और डॉक्टरों के बीच काफी देर तक बहस हुई। पुलिस ने बिना अनुमति प्रदर्शन करने और सड़क जाम करने की बात कही। दूसरी डॉक्टरों ने अपने आंदोलन को लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें उठाने का प्रयास बताया।
हाथों में तख्तियां, जुबां पर एक ही मांग
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में बॉन्डेड MBBS डॉक्टर शामिल हुए। उनके हाथों में ‘One Bond One Salary’ और ‘बॉन्डेड मेडिकल अधिकारियों को न्याय दो’ जैसी तख्तियां थीं। प्रदर्शनकारी डॉक्टरों का आरोप है कि डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने 2 सितंबर को उनकी मांगें पूरी करने और 24 घंटे में शासनादेश जारी कराने का आश्वासन दिया था लेकिन अब तक शासनादेश जारी नहीं हुआ।
50 हजार और 1.10 लाख रुपये के वेतन का अंतर
यह आंदोलन सरकारी मेडिकल कॉलेजों के 2018, 2019 और 2020 बैच के बॉन्डेड MBBS डॉक्टर कर रहे हैं। उनका कहना है कि समान डिग्री, बॉन्ड, काउंसलिंग और चयन प्रक्रिया के बावजूद वेतन में बड़ा अंतर है। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक कुछ डॉक्टरों को करीब 50 से 55 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय मिल रहा है जबकि समान बॉन्ड सेवा में कार्यरत कुछ अन्य डॉक्टरों का वेतन करीब 1.10 लाख रुपये प्रतिमाह तक है।

डॉक्टर वेतन में समानता लागू करने के साथ बकाया एरियर का भुगतान भी चाहते हैं। उनका कहना है कि बॉन्ड सेवा के तहत दो साल तक अनिवार्य सरकारी सेवा करनी होती है या 10 लाख रुपये के बॉन्ड की बाध्यता रहती है। इस दौरान ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) और अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में तैनाती की जाती है।
प्रदर्शनकारी डॉक्टरों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर कई दिनों से अधिकारियों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं लेकिन समाधान नहीं निकलने से उन्हें सड़क पर उतरना पड़ा। अब उनकी मांग है कि सरकार वेतन संबंधी विसंगति दूर करने के लिए जल्द शासनादेश जारी करे और बकाया एरियर का भुगतान सुनिश्चित करे।






