कन्या पूजन से आगे बढ़ी परंपरा, लखनऊ में 9 बुजुर्ग व विधवा महिलाओं के चरण धोकर किया माता पूजन
नरही में नागरिक एवं व्यापारी कल्याण समिति की अनूठी पहल, नवदुर्गा का प्रतीक मानकर बुजुर्ग माताओं को पहनाई शॉल और भेंट किए फल, उपेक्षित महिलाओं को सम्मान देने का संदेश

लखनऊ, 20 अक्टूबर 2026:
नवरात्रि में कन्या पूजन की परंपरा तो सदियों पुरानी है लेकिन समाज में अक्सर उपेक्षा का जीवन जीने वाली बुजुर्ग व विधवा महिलाओं को सम्मान देने की पहल ने एक नई मिसाल पेश की है। यूपी की राजधानी लखनऊ में शारदीय नवरात्रि की नवमी पर एक अनूठे आयोजन के जरिए नौ बुजुर्ग महिलाओं को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर उनका पूजन किया गया। इस पहल का मकसद उन महिलाओं के जीवन में खुशियों के कुछ पल जोड़ना और समाज में उनके प्रति सम्मान का भाव मजबूत करना है।

नरही में शुरू हुई माता पूजन की परंपरा
लखनऊ के नरही बाजार स्थित पुराने ताड़ी खाना चौराहे के निकट नागरिक एवं व्यापारी कल्याण समिति की ओर से सोमवार को माता पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें नौ गरीब, बुजुर्ग और विधवा महिलाओं को नवदुर्गा का प्रतीक मानकर सम्मानित किया गया। परंपरागत कन्या पूजन से अलग इस आयोजन में बुजुर्ग माताओं की सेवा और सम्मान का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं के चरण धोए गए, उनकी पूजा-अर्चना की गई और आरती उतारी गई। इसके बाद हर बुजुर्ग माता को प्रसाद के रूप में पांच फल और एक शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया। आयोजन का भाव धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहा। उन महिलाओं के प्रति संवेदना और आदर व्यक्त करना भी था.जिन्हें उम्र के इस पड़ाव पर अक्सर अकेलेपन और उपेक्षा का सामना करना पड़ता है।
‘उपेक्षित माताओं के चेहरे पर आए मुस्कान’
कार्यक्रम के संयोजक सुभाष श्रीवास्तव ने बताया कि नवरात्रि की अष्टमी और नवमी पर घर-घर कन्या पूजन होता है। इसी परंपरा से आगे बढ़ते हुए समाज की बुजुर्ग और विधवा महिलाओं को सम्मान देने के लिए माता पूजन की शुरुआत की गई है। इसका मकसद उनके जीवन में खुशी के कुछ पल लाना और समाज को उनके प्रति अपनी जिम्मेदारी का एहसास कराना है। इस आयोजन में सुभाष श्रीवास्तव के साथ विपिन कांत, मुबारक, राजेश कुमार चन्द्र, ऋषभ सिंह, विनय कुमार, विवेक द्विवेदी, अश्वनी कुमार, विशाल साहू, करन और अनिल यादव समेत बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।






