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लखनऊ : खामेनेई की मौत पर गम में डूबा शिया समुदाय… इमामबाड़ा व दुकानें बंद, रो पड़ीं महिलाएं

सड़कों पर उतरा शिया समुदाय, धर्मगुरु ने किया तीन दिन के शोक का ऐलान, घरों पर लगे काले झंडे, अमेरिका व इजराइल मुर्दाबाद के नारे गूंजे, शाम को निकलेगा कैंडिल मार्च

लखनऊ, 1 मार्च 2026:

अमेरिका और इजराइल के अटैक में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई मौत की मौत पर प्रदेश की राजधानी में रहने वाला शिया समुदाय मातम में डूब गया। इमामबाड़ा समेत कई स्थानों पर हजारों लोग सड़क पर उतरकर मातम मना रहे हैं। मुस्लिम महिलाएं छाती पीटकर रोतीं रहीं और खामनेई जिंदाबाद व अमेरिका-इजराइल मुर्दाबाद के नारे लगते रहे। इस शोक का आलम ये है कि तीन दिन के लिए बड़ा व छोटा इमामबाड़ा पर्यटकों के लिए बंद कर दिए गए हैं।

ईरान में ख़ामेनेई की मौत के बाद दिल्ली में ईरान के दूतावास का झंडा शोक में झुका दिया गया है। वहीं सूबे की राजधानी में शिया समुदाय गम में डूब गया। घरों से निकलकर हजारों लोग सड़क पर आ गए और ख़ामेनेई की तस्वीर लेकर रोते रहे। इस दौरान नारे भी लगते रहे और महिलाएं रोकर अपने गुस्से का इजहार करतीं रहीं। ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड की तरफ से तीन दिन के शोक की घोषणा की गई है। इस दौरान लोगों ने अपने घरों पर काले झंडे लगाए। बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। दुनिया सोचती है कि खामेनेई को मारकर ईरान खत्म हो जाएगा। अमेरिका और इजरायल को ईरान से करारा जवाब मिलेगा। उन्होंने कहा कि अयातुल्ला खामनेई के नाम पर हम मजलिस का आयोजन भी करेंगे।

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धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद ने लोगों से इस दौरान अपने-अपने स्तर पर शोक मनाने की अपील की है। उनकी तरफ से अपील में कहा गया है कि शोक के इन तीन दिनों के दौरान सभी घरों, इमामबाड़ों और धार्मिक स्थलों पर काले परचम लगाए जाएं। साथ ही शहर के दुकानदारों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों से भी अनुरोध किया गया है कि वे अपने प्रतिष्ठान बंद रखें, ताकि पूरे शहर में एकजुटता के साथ शोक व्यक्त किया जा सके। इस शोक कार्यक्रम के तहत आज रात 8 बजे शहर के ऐतिहासिक छोटा इमामबाड़ा में एक विशेष शोकसभा आयोजित की जाएगी। इस शोकसभा में बड़ी संख्या में लोग शामिल होंगे। शोकसभा के बाद कैंडल मार्च भी निकाला जाएगा, जिसमें लोग मोमबत्तियां जलाकर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।

जानिए कौन थे अयातुल्ला अली खामेनेई

बता दें कि अली खामेनेई का जन्म 1939 में ईरान के मशहद शहर में हुआ था। वे 1989 से ईरान के सुप्रीम लीडर थे। इससे पहले वे 1981 से 1989 तक ईरान के राष्ट्रपति भी रहे। ईरान में सुप्रीम लीडर देश का सबसे ताकतवर पद होता है। सेना, न्यायपालिका, मीडिया और बड़ी नीतियों पर अंतिम फैसला सुप्रीम लीडर का ही होता है।

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