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केंद्रीय बजट की कई घोषणाओं को लखनऊ के व्यापारियों ने सराहा लेकिन टैक्स सरलीकरण पर निराशा

छोटे और खुदरा व्यापारियों की पुरानी मांगों को अनदेखा किए जाने पर व्यक्त की नाराजगी, वन ट्रेड-वन टैक्स की मांग एक बार फिर रह गई अनसुनी

लखनऊ, 1 फरवरी 2026:

संसद में पेश किए गए केंद्रीय बजट को लेकर यूपी की राजधानी लखनऊ में व्यापारियों की ओर से तीखी लेकिन संतुलित प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। बजट को लेकर व्यापारियों ने इसे आर्थिक विकास और निर्यात को गति देने वाला बताया तो छोटे और खुदरा व्यापारियों की पुरानी मांगों को अनदेखा किए जाने पर निराशा व्यक्त की गई।

लखनऊ व्यापार मंडल के अध्यक्ष अमरनाथ मिश्र ने कहा कि यह आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और निर्यात वृद्धि को केंद्र में रखकर तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि विभिन्न अंतरराष्ट्रीय सरकारों के साथ हुए एफटीए (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट) समझौतों के बाद उत्पादों और संबंधित शुल्कों में दी गई छूट से चमड़ा, जूता, कपड़ा समेत अन्य निर्यात क्षेत्रों को बड़ा लाभ मिलेगा। इससे भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी।

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अमरनाथ मिश्र

उन्होंने रक्षा क्षेत्र में उपयोग होने वाली वस्तुओं पर उत्पाद शुल्क को 20 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत किए जाने को तर्कसंगत कदम बताया। इससे रक्षा उत्पादन की लागत कम होगी और ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही 17 जीवन रक्षक दवाओं पर आयात शुल्क में कटौती को कैंसर, शुगर, बीपी जैसे गंभीर रोगों से पीड़ित मरीजों के लिए बड़ी राहत बताया गया। बायो-फार्मा क्षेत्र के लिए 10 करोड़ रुपये के प्रावधान को दवा उद्योग के लिए प्रोत्साहनकारी कदम माना गया।

अमरनाथ मिश्र ने एनआरआई निवेश को बढ़ावा देने, मोटर दुर्घटना मुआवजे को टैक्स-फ्री करने और विदेश में पढ़ रहे छात्रों पर टीसीएस कटौती को 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत करने के फैसले को भी सकारात्मक बताया। कर विवादों के निस्तारण के लिए 5 करोड़ रुपये तक के मामलों में 20 प्रतिशत टैक्स व 20 प्रतिशत पेनाल्टी जमा कर समाधान की व्यवस्था को मुकदमेबाजी कम करने वाला कदम बताया गया।

वहीं लखनऊ व्यापार मंडल के वरिष्ठ महामंत्री पवन मनोचा ने बजट पर असंतोष जताते हुए कहा कि ‘वन ट्रेड-वन टैक्स’ की मांग एक बार फिर अनसुनी रह गई। उन्होंने कहा कि अलग-अलग एचएसएन कोड और टैक्स स्लैब व्यापारियों को अनावश्यक रूप से जटिलताओं में उलझा रहे हैं। ऑनलाइन पॉलिसी में एंट्री टैक्स की मांग न माने जाने और सोने-चांदी के कारोबार से जुड़ी समस्याओं पर ठोस कदम न उठाने से खुदरा व्यापार और सराफा बाजार में निराशा है।

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पवन मनोचा

व्यापारी नेता संदीप बंसल ने कहा कि इनकम टैक्स में राहत की उम्मीद थी लेकिन कर चोरी पर सजा के बजाय जुर्माने का प्रावधान स्वागत योग्य है। कुल मिलाकर बजट ने कुछ क्षेत्रों को राहत दी है, लेकिन छोटे व्यापारियों की अपेक्षाएं अभी भी अधूरी नजर आ रही हैं। इसी तरह व्यापारी नेता अशोक मोतियानी, मन्नू तेजवानी, संजय जसवानी आदि की प्रतिक्रिया भी मिलीजुली रही।

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