लखनऊ, 3 फरवरी 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ में यूजीसी की नई गाइडलाइंस को लेकर छात्र राजनीति गरम है। एक ओर जहां बीते दिनों यूजीसी निर्देशों के विरोध में प्रदर्शन हुए थे वहीं मंगलवार को उनके समर्थन में छात्रों ने आवाज बुलंद की। बिरसा अंबेडकर फुले छात्र संगठन (बीएपीएसओ) के बैनर तले छात्रों ने लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर से परिवर्तन चौक तक समर्थन मार्च निकाला और वहां बैठकर नारेबाजी की।
प्रदर्शन के दौरान हालात उस समय तनावपूर्ण हो गए जब पुलिस ने छात्रों को रोकने की कोशिश की। इस पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच नोकझोंक हुई। पुलिस ने कई छात्रों को हिरासत में ले लिया और उन्हें बसों में बैठाकर दूसरी जगह भेज दिया। एहतियातन मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा।
बीएपीएसओ के पदाधिकारी आकाश कठेरिया ने आरोप लगाया कि दो दिन पहले यूजीसी के नए नियमों के विरोध में बाहरी लोग लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर में प्रदर्शन कर रहे थे तब निषेधाज्ञा लागू नहीं की गई थी। अब जब छात्र यूजीसी गाइडलाइंस के समर्थन में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं तो अचानक निषेधाज्ञा लागू कर दी गई। उन्होंने कहा कि संगठन अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत प्रदर्शन करेगा और कई जिलों से छात्र लखनऊ पहुंच रहे हैं।

प्रदर्शन में शामिल छात्रों का कहना है कि यूजीसी गाइडलाइंस 2026 उच्च शिक्षा संस्थानों में सामाजिक न्याय और बराबरी सुनिश्चित करने के लिए बेहद जरूरी हैं। छात्रों ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालयों में ओबीसी, एससी और एसटी वर्गों के साथ लगातार भेदभाव हो रहा है। विशेष रूप से शिक्षकों की नियुक्ति में नॉट फाउंड सूटेबल जैसे प्रावधानों का दुरुपयोग किया जा रहा है।
छात्र संगठन का दावा है कि जनवरी 2020 तक किसी भी केंद्रीय विश्वविद्यालय में एक भी ओबीसी प्रोफेसर की नियुक्ति नहीं हुई थी, जो संविधान के सामाजिक समानता के सिद्धांतों के खिलाफ है। संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि देशभर में ओबीसी, एससी और एसटी वर्गों के खिलाफ जातिगत भेदभाव के मामलों में काफी बढ़ोतरी हुई है।
बीएपीएसओ ने जुलाई 2025 में संसद में दी गई जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों में आरक्षित वर्गों के लिए स्वीकृत पदों का बड़ा हिस्सा आज भी खाली पड़ा है। साथ ही विश्वविद्यालयों में महिलाओं और आरक्षित वर्गों की शीर्ष पदों पर भागीदारी बेहद कम बताई गई। संगठन ने यूजीसी और केंद्र सरकार से इन मुद्दों पर स्पष्ट जवाब देने और नए नियमों को पूरी सख्ती से लागू करने की मांग की है।






