नई दिल्ली, 15 जनवरी 2026:
नीट पीजी-2025 में देशभर के मेडिकल कॉलेजों में खाली पड़े 18,000 से ज्यादा स्नातकोत्तर (PG) सीटों को देखते हुए राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान बोर्ड (NBEMS) ने कटऑफ पर्सेंटाइल में बड़ा बदलाव किया है। अब आरक्षित वर्ग के लिए कटऑफ 40 से घटाकर शून्य कर दिया गया है। मतलब, अब माइनस 40 अंक वाले उम्मीदवार भी स्नातकोत्तर में दाखिला ले सकेंगे। सामान्य वर्ग और इंडब्ल्यूएस उम्मीदवारों के लिए कटऑफ 50 से घटाकर 7 पर्सेंटाइल, जबकि सामान्य वर्ग के दिव्यांगों के लिए 45 से घटाकर 5 पर्सेंटाइल किया गया है।
इस बदलाव से आरक्षित वर्ग में पहले 235 अंक वाले उम्मीदवार पात्र थे, अब माइनस 40 अंक वाले भी पात्र होंगे। सामान्य वर्ग में पहले 276 अंक जरूरी थे, अब 103 अंक वाले उम्मीदवार भी दाखिले के योग्य हैं। सामान्य दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए कटऑफ पहले 255 अंक था, अब केवल 90 अंक पाने वाले भी प्रवेश पा सकते हैं। यह नया नियम नीट पीजी के दूसरे दौर की काउंसलिंग पूरी होने के बाद लागू किया गया।

एनबीईएमएस ने साफ किया है कि पीजी प्रवेश प्रक्रिया केवल काउंसलिंग के जरिए होगी। किसी भी तरह का डायरेक्ट या विवेकाधीन प्रवेश मान्य नहीं होगा। सभी सीटों का आवंटन मेरिट और उम्मीदवार की पसंद के आधार पर होगा। बोर्ड ने कहा कि प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होगी और शैक्षणिक मानकों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) के संरक्षक डॉ. रोहन कृष्णन के मुताबिक शून्य या माइनस अंक वाले उम्मीदवार अब विशेषज्ञ चिकित्सक बनने के योग्य घोषित किए गए हैं। उनका कहना है कि यह परीक्षा के मूल उद्देश्य के खिलाफ है और देश में मेडिकल मानकों का पतन हो सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर न्यूनतम कटऑफ शून्य कर दी जाए, तो राष्ट्रीय योग्यता परीक्षा का मकसद क्या रह जाएगा।
एनबीईएमएस ने यह बदलाव देशभर की खाली सीटों को भरने और योग्य उम्मीदवारों को मौका देने के लिए किया है। अब आरक्षित, सामान्य और दिव्यांग उम्मीदवार न्यूनतम अंक लाकर भी पीजी प्रवेश के योग्य होंगे। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि सीट आवंटन केवल योग्यता और चॉइस के आधार पर होगा, ताकि प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बनी रहे।






