लखनऊ, 18 फरवरी 2026:
बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने आगामी यूपी विधानसभा चुनाव अकेले लड़ने का बड़ा एलान किया। उन्होंने साफ कहा कि बसपा किसी भी पार्टी से गठबंधन नहीं करेगी और अपने बलबूते 2007 की तरह पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के लक्ष्य के साथ मैदान में उतरेगी। लखनऊ में बुधवार को मायावती ने गठबंधन की खबरों को ‘फेक न्यूज’ बताते हुए कार्यकर्ताओं से ‘हाथी की मस्त चाल’ के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।
सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर जारी बयान में
मायावती ने कहा कि इन दिनों लोकतंत्र और संविधान को मजबूत करने के बजाय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को सफलता की कुंजी बताने वाली स्वार्थी चर्चाएं चल रही हैं। उनका तर्क है कि तकनीक की चमक के बीच संविधान और सामाजिक न्याय के मूल्यों को कमजोर नहीं पड़ने देना चाहिए। उन्होंने ‘अंबेडकरवादियों’ से देशभर में जुटकर डॉ. भीमराव अंबेडकर के आत्म-सम्मान और स्वाभिमान के आंदोलन को मजबूत करने की अपील की।
मायावती ने आरोप लगाया कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे विरोधी दल साम-दाम-दंड-भेद जैसे हथकंडों से बसपा को सत्ता से दूर रखने की कोशिश करेंगे। उन्होंने कांग्रेस, सपा और भाजपा की नीतियों को अंबेडकर विरोधी बताते हुए कहा कि बसपा से गठबंधन की चर्चाएं केवल वोटों के चुनावी स्वार्थ के लिए फैलाई जाती हैं। उनका दावा था कि गठबंधन से बसपा को फायदा नहीं, नुकसान ही हुआ है। इसीलिए पार्टी 2027 के मिशन में अकेले ही पूरी ताकत झोंक रही है।
दिल्ली में टाइप-8 बंगले को लेकर फैलाई जा रही चर्चाओं पर भी उन्होंने खुलकर बात की। मायावती ने कहा कि लखनऊ के स्टेट गेस्ट हाउस कांड के बाद उनकी सुरक्षा को लेकर खतरा बढ़ा और इसी कारण उन्हें उच्च सुरक्षा के मद्देनजर टाइप-8 बंगला आवंटित किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मुद्दे पर भी लोगों को गुमराह किया जा रहा है। उनके मुताबिक 2 जून 1995 की घटना के बाद से सुरक्षा कारणों से उन्हें केंद्र सरकार की ओर से उच्च सुरक्षा मिली और खतरा कम होने के बजाय बढ़ा है।
अंत में बसपा सुप्रीमो ने पार्टी समर्थकों से मिशनरी भावना के साथ पूरे तन-मन-धन से जुटने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि केवल यूपी ही नहीं, बल्कि देशभर के अंबेडकरवादियों को बसपा और उसके ‘आयरन नेतृत्व’ पर भरोसा रखकर संविधान और सामाजिक न्याय के आंदोलन को मजबूती देनी चाहिए।






