लखनऊ, 21 मार्च 2026:
उत्तर प्रदेश में गांव की महिलाएं अब दूध के कारोबार से अपनी अलग पहचान बना रही हैं। प्रदेश में करीब साढ़े तीन लाख महिलाएं दुग्ध संग्रहण और उससे जुड़े काम से जुड़कर खुद कमाने लगी हैं। बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी के चलते यह क्षेत्र तेजी से बढ़ा है और राज्य देश में सबसे आगे पहुंच गया है।
यूपी सरकार द्वारा दुग्ध उत्पादन नीतियों में ग्रामीण महिलाओं पर खास ध्यान देने से यह बदलाव तेजी से आगे बढ़ा है। गांवों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है और वे अब स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों का अहम हिस्सा बन चुकी हैं। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के जरिए गांवों में महिला समूहों को जोड़ा गया, जिससे यह बदलाव जमीन पर दिखने लगा। छोटे स्तर पर शुरू हुआ काम अब संगठित ढांचे में बदल चुका है।
दूध की खरीद और सप्लाई की पूरी कड़ी मजबूत होने से अब उत्पाद का बेहतर दाम मिल रहा है। भुगतान भी तय समय पर और साफ तरीके से हो रहा है, जिससे महिलाओं और किसानों का भरोसा बढ़ा है। इसका सीधा असर उनकी कमाई पर पड़ा है।
इस काम से गांवों में रोजगार के मौके भी बढ़े हैं। महिलाएं घर के पास ही काम कर रही हैं और परिवार की आमदनी में हाथ बंटा रही हैं। धीरे-धीरे यह काम बड़े आर्थिक मॉडल का रूप लेता जा रहा है। सरकारी योजनाओं के तहत महिलाओं को ट्रेनिंग, आर्थिक मदद और बाजार से जोड़ने की सुविधा मिली है। इसके चलते स्वयं सहायता समूहों के जरिए महिलाएं अब अपने फैसले खुद लेने लगी हैं और आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं।






