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मॉस्को में गूंजेगा राम का नाम : रामनगरी अयोध्या के वैभव से प्रभावित रूसी कलाकार करेंगे रामलीला

‘रूसी राम’ गेनादी पेचनिकोव की 100वीं जयंती पर भारत-रूस की सांस्कृतिक मित्रता का स्मरण, रूसी कलाकारों ने सराहा अयोध्या का विकास, रामराज्य के आदर्शों को रंगमंच के जरिए जन-जन तक पहुंचाने पर जोर

लखनऊ, 19 अक्टूबर 2026:

रामनगरी अयोध्या में दिवाली की जगमगाहट और रामलीला की भव्यता रूस की राजधानी मॉस्को में भी सांस्कृतिक चर्चा का विषय बन रही है। भगवान राम के आदर्शों और भारतीय संस्कृति से प्रभावित रूसी कलाकार रंगमंच के माध्यम से रामकथा को लोगों तक पहुंचाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। मॉस्को में सोवियत रंगमंच के प्रतिष्ठित अभिनेता और ‘रूसी राम’ के नाम से प्रसिद्ध गेनादी मिखाइलोविच पेचनिकोव की 100वीं जयंती पर आयोजित समारोह में अयोध्या के विकास, रामलीला और भारत-रूस के सांस्कृतिक रिश्तों पर चर्चा हुई। रूसी कलाकारों और बुद्धिजीवियों ने राम के आदर्शों को दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।

समारोह में वक्ताओं ने कहा कि भगवान राम का जीवन केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है अपितु उनके आदर्श मानवता, कर्तव्य, मर्यादा और सुशासन की प्रेरणा भी देते हैं। रामलीला के जरिए इन मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा सकता है। कलाकारों ने दिवाली पर अयोध्या की भव्यता का उल्लेख करते हुए मॉस्को में भी रामलीला के माध्यम से भारतीय संस्कृति की झलक प्रस्तुत करने की इच्छा जताई।

अयोध्या के विकास ने खींचा रूसी कलाकारों का ध्यान

मॉस्को में आयोजित कार्यक्रम में बाल रंगमंच की निदेशक अल्ला लियोनिदोव्ना ने अयोध्या में हुए विकास कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि रामलीला और विकास से जुड़े प्रयासों ने अयोध्या को नई पहचान दी है। रामकथा के मंचन के जरिए रूस में भी रामराज्य की अवधारणा और भगवान राम के आदर्शों को समझने का अवसर मिल रहा है। उनके मुताबिक रामलीला भारतीय परंपरा को जानने और राम के जीवन से प्रेरणा लेने का प्रभावी माध्यम है।

पिता ने अभिनय से जोड़ीं भारत-रूस की संस्कृतियां

‘रूसी राम’ गेनादी पेचनिकोव की पुत्री तात्याना पेचनिकोव ने अपने पिता को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अभिनय के माध्यम से भारत और रूस की मित्रता को नई पहचान दी। भगवान राम की भूमिका निभाकर उन्होंने रूसी समाज को भारतीय संस्कृति और परंपराओं से परिचित कराया। तात्याना ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बदलावों और अयोध्या के बढ़ते वैभव ने रामकथा से जुड़े सांस्कृतिक आकर्षण को और व्यापक बनाया है। उनके पिता का योगदान दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंध मजबूत करने में महत्वपूर्ण रहा।

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रंगमंच से रूसी समाज तक पहुंचे राम के आदर्श

मॉस्को के एर्शोव थिएटर संस्थान के वीसी बिताली एवगेनिविच दाशिंस्की ने कहा कि पेचनिकोव ने रूसी समाज को भगवान राम और रामराज्य की अवधारणा से परिचित कराया। वहीं, संस्थान की रेक्टर अलेक्जेंड्रा कोनेवा ने कहा कि भगवान राम का जीवन लोगों को सही तरीके से जीने की प्रेरणा देता है। रंगमंच के जरिए उनके चरित्र और विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा सकता है।
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मॉस्को में रामलीला के निर्माता एवं निर्देशक डॉ. रामेश्वर सिंह ने बताया कि पेचनिकोव सोवियत रंगमंच के प्रतिष्ठित अभिनेता थे। भगवान राम की भूमिका में उनकी पहचान ने उन्हें ‘रूसी राम’ का नाम दिलाया। उनकी जन्मशताब्दी पर आयोजित समारोह ने एक बार फिर यह रेखांकित किया कि कला और संस्कृति राजनीतिक सीमाओं से परे जाकर देशों को जोड़ सकती हैं। रामकथा के जरिए भारत और रूस की यह सांस्कृतिक निकटता आज भी नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बन रही है।

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Rakesh Kumar Verma

राकेश कुमार वर्मा एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें मीडिया जगत में लगभग 31 वर्षों का व्यापक और समृद्ध अनुभव है। इन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य करते हुए अपनी मजबूत और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। यूपी की राजधानी लखनऊ में स्वतंत्र भारत, राष्ट्रीय सहारा, जनसत्ता एक्सप्रेस,… More »

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