सीतापुर/बाराबंकी, 5 जनवरी 2026:
कॉलेज के लिए घर से निकली छात्रा महकप्रीत की मौत से परिवार व पूरा इलाका स्तब्ध है। सीतापुर बिस्वा क्षेत्र की रहने वाली महकप्रीत कौर 15 दिसंबर को बाइक से कॉलेज जाने के लिए निकली थी, लेकिन घर वापस नहीं लौटी। परिजनों ने उसी दिन उसकी तलाश शुरू की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। अगले दिन यानी 16 दिसंबर को छात्रा की बाइक घर से करीब 12 किलोमीटर दूर कोठरापुर के पास बरामद हुई। इसके बावजूद महकप्रीत का पता नहीं चल सका। कई दिनों तक खोजबीन के बाद एक जनवरी को उसका शव बाराबंकी के फतेहपुर कोतवाली क्षेत्र में नहर से बरामद हुआ।

शव कई दिन पुराना होने के कारण उसकी पहचान नहीं हो पा रही थी। उसने पुरुषों जैसे कपड़े पहन रखे थे सिर पर पगड़ी भी थी। तीन दिन तक शव अज्ञात के रूप में रखा गया। रविवार को लावारिस समझकर अंतिम संस्कार की तैयारी तक हो गई थी, तभी ऐन वक्त पर पिता जगदीप सिंह रिश्तेदारों के साथ वहां पहुंच गए। पहचान होने के बाद शव का पोस्टमार्टम कराया गया। पता चला कि महकप्रीत बिसवां थाना क्षेत्र के न्यौराजपुर पोस्ट उलरा निवासी थी। 16 साल की महक बीबीए की पढ़ाई कर रही थी। तीन बहनों में सबसे बड़ी महक काफी होनहार थी। वो बाइक चलाती तो ट्रैक्टर से खेत की जुताई भी करती थी।
महकप्रीत के बैग से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है। नोट में उसने अपने माता-पिता से माफी मांगते हुए लिखा है कि वह अब कभी वापस नहीं लौटेगी और उसे अब रब का सहारा है। घटना के बाद पिता जगदीप सिंह ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बाइक मिलने के बाद भी ठोस कार्रवाई नहीं की गई। एक युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ हुई, दूसरे का नाम भी सामने आया, लेकिन बाद में दोनों को छोड़ दिया गया। पिता का आरोप है कि बेटी को परेशान किया जा रहा था, जिससे वह मानसिक दबाव में थी। परिवार का कहना है कि दोषियों को सजा दिलाने के लिए वे हर स्तर पर लड़ाई लड़ेंगे।
पुलिस ने इस सुसाइड नोट को जांच का अहम आधार माना है। पुलिस की जांच अब मोबाइल फोन के जरिए आगे बढ़ाई जा रही है। छात्रा के कॉल रिकॉर्ड, लोकेशन और आखिरी बातचीत की जानकारी जुटाई जा रही है। आरोपी बताए जा रहे युवक से भी नए सिरे से पूछताछ की तैयारी है। जांच में परिजनों को भी शामिल किया जाएगा। पुलिस सुसाइड नोट की लिखावट की जांच कराएगी। आशंका जताई जा रही है कि कहीं यह नोट बाद में तो नहीं रखा गया। यह भी देखा जा रहा है कि जांच को भटकाने की कोई कोशिश तो नहीं की गई।






