योगेंद्र मलिक
नैनीताल, 8 जनवरी 2026:
उत्तराखंड के प्राथमिक स्कूलों में सहायक शिक्षकों की भर्ती में सामने आई गंभीर खामियों पर नैनीताल हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकल पीठ ने साफ कहा कि तय योग्यता शर्तें पूरी न करने वाले अभ्यर्थियों को नियुक्ति देना कानून का उल्लंघन है। अदालत ने 11 योग्य याचिकाकर्ताओं को चार सप्ताह के भीतर अस्थायी रूप से नियुक्ति देने के निर्देश जारी किए हैं।
यह मामला विनय कुमार सहित अन्य अभ्यर्थियों की याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिकाकर्ताओं ने बताया कि वर्ष 2016 की भर्ती प्रक्रिया में विभाग ने केवल सीटीईटी पास अभ्यर्थियों को नियुक्ति दे दी, जबकि राज्य के नियमों के अनुसार बीएड डिग्रीधारकों के लिए राज्य स्तरीय टीईटी पास करना अनिवार्य था। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे बीएड और टीईटी दोनों उत्तीर्ण होने के बावजूद चयन से वंचित रह गए।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि 2016 की संशोधित सेवा नियमावली के अनुसार प्राथमिक शिक्षक पद के लिए केवल राज्य स्तर की टीईटी परीक्षा पास अभ्यर्थी ही पात्र हैं। कोर्ट ने सचिव और निदेशक की इस दलील को खारिज कर दिया कि सीटीईटी और टीईटी को समान माना जा सकता है। अदालत ने कहा कि भर्ती विज्ञापन में सीटीईटी धारकों को योग्य ठहराना सेवा नियमों और एनसीटीई की अधिसूचना का सीधा उल्लंघन है।
कोर्ट के सामने यह भी तथ्य आया कि वर्ष 2011 के बाद सीबीएसई ने बीएड डिग्रीधारकों को प्राथमिक स्तर की सीटीईटी परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी थी। इसके बावजूद बिना सही जांच के नियुक्तियां कर दी गईं। इसे गंभीर मानते हुए हाईकोर्ट ने सरकार से उन अधिकारियों की सूची मांगी है, जिन्होंने इस अनुचित पद आवंटन को लागू किया।
राज्य में प्राथमिक शिक्षकों के कुल 2,135 पद रिक्त हैं। इसी को देखते हुए कोर्ट ने पहले 11 पद रिक्त रखने का आदेश दिया था। अब अदालत ने निर्देश दिया है कि इन पदों पर याचिकाकर्ताओं की दावेदारी पर विचार कर चार सप्ताह में नियुक्ति दी जाए, जो अंतिम फैसले के अधीन होगी। हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव और शिक्षा सचिव पर भी नाराजगी जताई और मामले की अगली सुनवाई 16 फरवरी तय की है। अगली तिथि पर सरकार को जिम्मेदार अधिकारियों का पूरा विवरण पेश करना होगा।






