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UP में आयुष से कैंसर-डायबिटीज के इलाज की नई उम्मीद, अस्पताल बनेंगे रिसर्च सेंटर

सेंट्रल रिसर्च सेंटर से एमओयू की चल रही कवायद, अति गंभीर बीमारियों पर होगा रिसर्च, अस्पतालों को रिसर्च ओरिएंटेड सेंटर के रूप में विकसित करने पर मंथन, रिसर्च के निष्कर्षों के आधार पर तैयार किया जाएगा स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल

लखनऊ, 18 जनवरी 2026:

यूपी में आयुष चिकित्सा पद्धतियों को नई पहचान और नई ऊंचाई देने की दिशा में सरकार एक बड़ा और दूरगामी कदम उठाने जा रही है। प्रदेश के आयुष अस्पताल अब सिर्फ इलाज तक सीमित नहीं रहेंगे। उन्हें आधुनिक रिसर्च सेंटर हब के रूप में विकसित करने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए सेंट्रल रिसर्च सेंटर (केंद्रीय अनुसंधान संस्थान) के साथ एमओयू किया जाएगा।

इस पहल के तहत आयुर्वेद, योग, यूनानी और होम्योपैथी पद्धतियों के माध्यम से कैंसर, डायबिटीज, हृदय रोग जैसी गंभीर और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों पर गहन शोध किया जाएगा। प्रमुख सचिव आयुष रंजन कुमार ने बताया कि सीएम योगी के नेतृत्व में आयुष को प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए लगातार ठोस प्रयास किए जा रहे हैं।

सरकार का मानना है कि आधुनिक चिकित्सा के साथ आयुष पद्धतियों का समन्वय इलाज को अधिक प्रभावी बनाएगा। रोगों की रोकथाम में भी अहम भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप प्रदेश के चयनित आयुष अस्पतालों को रिसर्च ओरिएंटेड सेंटर के रूप में विकसित करने पर मंथन चल रहा है। यहां इलाज के साथ-साथ रोगों के कारण, उनके प्रभाव, जीवनशैली, खानपान और आयुष आधारित उपचार पद्धतियों पर डाटा आधारित वैज्ञानिक शोध किया जाएगा।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य आयुष आधारित उपचारों की प्रभावशीलता को ठोस वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ स्थापित करना है। सेंट्रल रिसर्च सेंटर से एमओयू होने के बाद आयुष चिकित्सकों को रिसर्च ट्रेनिंग, आधुनिक लैब सुविधाएं और तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।
रिसर्च का फोकस उन बीमारियों पर रहेगा जिनका बोझ तेजी से बढ़ रहा है। कैंसर और डायबिटीज के अलावा उच्च रक्तचाप, मोटापा, थायरॉइड, हृदय रोग, जोड़ों के रोग और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं भी शोध के दायरे में होंगी।

प्रमुख सचिव ने बताया कि इस एमओयू के बाद उत्तर प्रदेश आयुष रिसर्च के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी राज्य बनने की ओर अग्रसर होगा। इससे प्रदेश के चिकित्सकों और शोधकर्ताओं को नई पहचान मिलेगी और आयुष उपचार को वैश्विक स्तर पर स्वीकार्यता दिलाने में मदद मिलेगी। रिसर्च के निष्कर्षों के आधार पर स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल तैयार किए जाएंगे जिन्हें देश-विदेश में अपनाया जा सकेगा।

इस पहल से आयुष क्षेत्र में रोजगार और शोध के नए अवसर भी खुलेंगे। आयुष चिकित्सकों, शोधार्थियों और छात्रों को रिसर्च प्रोजेक्ट्स के जरिए काम करने का मंच मिलेगा। आयुष कॉलेजों के छात्रों को प्रैक्टिकल रिसर्च का अवसर मिलेगा। योगी सरकार की यह पहल प्रदेश को समग्र स्वास्थ्य मॉडल की दिशा में एक मजबूत कदम के रूप में देखी जा रही है।

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