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गो संरक्षण मिशन का नया मॉडल : महिला समूह व FPO संभालेंगे गोआश्रय स्थल, 2100 करोड़ से गांवों में रोजगार का रास्ता

गोसेवा और गो संरक्षण को ग्रामीण समृद्धि और रोजगार का मजबूत माध्यम बनाने की दिशा में माना जा रहा बड़ा कदम, योगी सरकार ने गोसेवा और गो संरक्षण को बनाया ग्रामीण समृद्धि का जरिया

लखनऊ, 7 मार्च 2026:

यूपी में गो संरक्षण मिशन को अब एक नया और व्यापक स्वरूप मिलने जा रहा है। पहली बार ग्रामीण महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को इस महत्त्वाकांक्षी अभियान से सीधे जोड़ा जाएगा। सीएम योगी की पहल पर गोसेवा और गो संरक्षण को ग्रामीण समृद्धि और रोजगार का मजबूत माध्यम बनाने की दिशा में यह बड़ा कदम माना जा रहा है।

गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि सीएम के निर्देश पर प्रदेश में गोवंश संरक्षण के लिए अभूतपूर्व अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में अब गो सेवा में रुचि रखने वाले महिला स्वयं सहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों को गोआश्रय स्थलों के संचालन में शामिल करने की तैयारी है। इससे न केवल गोवंश की बेहतर देखरेख सुनिश्चित होगी बल्कि ग्रामीण महिलाओं और किसानों को आय के नए अवसर भी मिलेंगे।

सरकार की योजना है कि ग्रामीण महिलाओं को इस मिशन का सक्रिय भागीदार बनाकर गो संरक्षण को जन आंदोलन का रूप दिया जाए। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार ने गो संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए अब तक का सबसे बड़ा 2000 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है। इसके अलावा 100 करोड़ रुपये वृहद गो संरक्षण केंद्रों की स्थापना के लिए अलग से निर्धारित किए गए हैं। इस प्रकार कुल 2100 करोड़ रुपये की राशि इस अभियान पर खर्च की जाएगी।

वर्तमान में प्रदेश में लगभग 7,500 गो आश्रय स्थलों के माध्यम से 12,38,547 निराश्रित गोवंश को सुरक्षित आश्रय दिया जा रहा है। इसके साथ ही 155 वृहद गो संरक्षण केंद्रों का निर्माण कार्य भी तेजी से चल रहा है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए मुख्यमंत्री सहभागिता योजना और पोषण मिशन के तहत अब तक 1,13,631 पशुपालकों को 1,81,418 गोवंश सुपुर्द किए जा चुके हैं।

गोवंश के भरण-पोषण के लिए सरकार पशुपालकों को प्रति गोवंश 50 रुपये प्रतिदिन की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में भेज रही है। इससे व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ी और भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगा है। सीएम योगी का मानना है कि गो संरक्षण केवल सांस्कृतिक और धार्मिक आस्था से जुड़ा विषय नहीं बल्कि आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत आधारशिला भी है। इसी सोच के तहत अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि गोवंश आधारित प्राकृतिक खेती, जैविक खाद, गोमूत्र से बने कीट नियंत्रक और गोबर से तैयार उत्पादों के जरिए गोआश्रय केंद्रों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जाए।

आयोग के अध्यक्ष ने बताया कि आगे चलकर हर जिले में चयनित महिला समूहों को प्रशिक्षण देकर गोवंश की देखभाल, पोषण और गो आधारित उत्पादों के प्रबंधन की जिम्मेदारी दी जाएगी। इससे ग्रामीण महिलाओं को रोजगार मिलेगा और गांवों में आय के नए स्रोत विकसित होंगे। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में हर जिले में कम से कम एक बड़ा गो संरक्षण केंद्र आत्मनिर्भर मॉडल के रूप में स्थापित किया जाए।

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