लखनऊ, 7 जनवरी 2026:
यूपी में रियल एस्टेट सेक्टर एक नए विकास दौर में प्रवेश कर चुका है। राज्य सरकार द्वारा टाउनशिप नीति में किए गए सुधारों का सीधा और सकारात्मक असर निवेश पर दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (UPRERA)की ताजा रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में प्रदेश के रियल एस्टेट क्षेत्र में कुल 68,328 करोड़ रुपये का पूंजी निवेश हुआ, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 44,526 करोड़ रुपये था। इस तरह निवेश में 53.5 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
बीते वर्ष प्रदेश में रिकॉर्ड 309 रियल एस्टेट परियोजनाएं पंजीकृत हुईं। यह राज्य सरकार की नीतियों और नियामक व्यवस्था पर निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है। खासतौर पर टाउनशिप नीति में किए गए बदलावों ने इस रफ्तार को गति दी है। सरकार ने बिल्डरों के लिए टाउनशिप विकसित करने की न्यूनतम सीमा 25 एकड़ से घटाकर 12.5 एकड़ कर दी। इससे मध्यम स्तर के डेवलपर्स को भी अवसर मिला।

नई नीति में आवंटियों के हितों को प्राथमिकता दी गई है। नियमों के अनुसार 25 एकड़ तक की टाउनशिप तीन वर्षों में और इससे बड़ी टाउनशिप अधिकतम पांच वर्षों में पूरी करना अनिवार्य किया गया है। पहले कई परियोजनाएं 8 से 12 वर्षों तक अधूरी रहती थीं। इससे खरीदारों का पैसा फंस जाता था। अब समयबद्ध पूर्णता से निवेशकों और आवंटियों दोनों को राहत मिल रही है। thehohallanews
रियल एस्टेट निवेश का दायरा अब एनसीआर तक सीमित नहीं रहा। 2025 में पंजीकृत 308 परियोजनाओं में से 122 एनसीआर क्षेत्र में, जबकि 186 परियोजनाएं गैर-एनसीआर जिलों में स्वीकृत हुईं। यह बदलाव बेहतर कनेक्टिविटी, मजबूत बुनियादी ढांचे और टियर-2 शहरों के विकास का परिणाम माना जा रहा है।

यूपी की राजधानी लखनऊ 67 परियोजनाओं के साथ अग्रणी केंद्र बनकर उभरी है। वहीं बरेली में 15 और आगरा में 14 परियोजनाएं दर्ज हुईं। इसके अलावा बुलंदशहर, रामपुर, चंदौली, उन्नाव, गोंडा, मऊ और मिर्जापुर जैसे जिलों में भी नए प्रोजेक्ट्स शुरू हुए हैं।
धार्मिक पर्यटन में तेजी ने भी रियल एस्टेट को बल दिया है। मथुरा में 23, अयोध्या में 5, वाराणसी में 9 और प्रयागराज में 7 परियोजनाएं पंजीकृत हुईं। बेहतर शहरी विकास, कनेक्टिविटी और श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के चलते ये शहर अब रियल एस्टेट के नए हॉटस्पॉट बनते जा रहे हैं।





