Lucknow City

लखनऊवासियों के लिए नववर्ष का तोहफा : बिना दफ्तर गए मिनटों में ‘फास्टपास’ से पास होगा मकान का नक्शा

लखनऊ विकास प्राधिकरण ने नए वर्ष पर शहरवासियों को दी एक महत्वपूर्ण सुविधा, map.up.gov.in पोर्टल पर करना होगा आवेदन, तैयार नक्शा और भवन का विवरण अपलोड करना होगा, सही जानकारी भरते ही मिल जाएगा प्रमाणपत्र

लखनऊ, 1 जनवरी 2026:

यूपी की राजधानी लखनऊ में अपने घर या दुकान का निर्माण कराने की योजना बना रहे लोगों के लिए नए साल की शुरुआत बड़े बदलाव के साथ हुई है। लंबे समय से बिल्डिंग का नक्शा (मानचित्र) पास कराने में लगने वाली भागदौड़, फाइलों के चक्कर और देरी की समस्या अब जल्द ही इतिहास बनने जा रही है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने नए वर्ष पर शहरवासियों को एक महत्वपूर्ण सुविधा प्रदान की है। इसके तहत बिना किसी अफसर या दफ्तर के चक्कर लगाए ऑनलाइन ही कुछ ही मिनटों में नक्शा पास हो सकेगा।

एलडीए ने नए बिल्डिंग बायलॉज के आधार पर फास्ट ट्रैक सिस्टम ‘फास्टपास’ लागू किया है। इस व्यवस्था के तहत अब 100 वर्गमीटर तक के आवासीय भवन और 30 वर्गमीटर तक के व्यावसायिक एवं कामर्शियल निर्माण के लिए मानचित्र संपत्ति का स्वामी स्वयं ऑनलाइन पास कर सकेगा। एलडीए के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के मुताबिक पूरी प्रक्रिया डिजिटल, पारदर्शी और तेज है। इससे आम नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी और पुरानी प्रक्रिया में होने वाली देरी व परेशानी से छुटकारा मिलेगा।

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ऑनलाइन आवेदन के लिए map.up.gov.in पोर्टल पर जाना होगा। आवेदक को अपना नाम और मोबाइल नंबर का रजिस्ट्रेशन कर लॉगिन आईडी और पासवर्ड बनाना होगा। इसके बाद निर्धारित मानकों के अनुसार तैयार मानचित्र (मैप) और भवन का विवरण अपलोड करना होगा। पोर्टल पर ही देय शुल्क का भुगतान भी किया जा सकेगा। आवेदन सबमिट होते ही सिस्टम स्वचालित रूप से मानचित्र की जांच करेगा। यदि सब कुछ तय मानकों के अनुरूप पाया गया तो चंद ही मिनटों में नक्शा स्वीकृत हो जाएगा। स्वीकृति के बाद आवेदक को स्वतः मान्यता प्राप्त प्रमाणपत्र और पास्ड मानचित्र डाउनलोड के लिए मिल जाएगा।

एलडीए अधिकारियों का कहना है कि यह सुविधा न केवल समय और ऊर्जा की बचत करेगी बल्कि अनुमोदन प्रक्रिया में फैली अनियमितताओं और मध्यस्थों की भूमिका को भी कम करेगी। साथ ही यह सुनिश्चित किया गया है कि भूखंड का उपयोग मास्टर प्लान के अनुरूप होना चाहिए तभी मानचित्र पास होगा। आवेदन के दौरान भूखंड की लोकेशन, सड़क की चौड़ाई, भवन की ऊंचाई, कवर्ड एरिया, सेटबैक, पार्किंग, प्रवेश एवं निकास, फ्रंट-एलीवेशन सहित अन्य मानकों की जानकारी अनिवार्य रूप से देनी होगी।

फास्टपास को स्मार्ट शासन व्यवस्था और डिजिटल इंडिया मिशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। निर्माण की योजना बनाने वाले शहरवासी इस नई प्रणाली को एक बड़े सुधार के रूप में देख रहे हैं। इससे यह उम्मीद बढ़ी है कि आने वाले समय में एलडीए और भी प्रक्रियाओं को ऑनलाइन कर पारदर्शिता बढ़ाएगा और शहर के विकास को तेज गति देगा।

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