खेल डेस्क, 19 जनवरी 2026:
इंदौर के होलकर स्टेडियम में रविवार को भारत को न्यूजीलैंड के खिलाफ तीसरे और आखिरी वनडे में 41 रन से हार का सामना करना पड़ा। इस हार के साथ ही टीम इंडिया ने तीन मैचों की वनडे सीरीज 2-1 से गंवा दी। साल 1988 के बाद पहली बार न्यूजीलैंड ने भारत में कोई द्विपक्षीय वनडे सीरीज जीती है। इतना ही नहीं, इंदौर में लगातार सात मैच जीतने के बाद भारत को इस मैदान पर पहली बार हार मिली। पिछले तीन महीनों में यह भारत की दूसरी वनडे सीरीज हार रही, जिसने घरेलू मजबूती पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रोहित शर्मा की पावरप्ले में नाकामी
इस सीरीज में भारत की सबसे बड़ी कमजोरी पावरप्ले रही और इसकी बड़ी वजह रोहित शर्मा का संघर्ष रहा। न तो वह तेज शुरुआत दे पाए और न ही पारी को स्थिर रख सके। खराब टाइमिंग, सीमित शॉट चयन और कम स्ट्राइक रेट के कारण टीम को शुरुआती झटके लगे। असिस्टेंट कोच रेयान टेन डेशकाटे ने भी माना कि रोहित इस सीरीज में क्रिकेट से शॉर्ट नजर आए। जब ओपनर रन नहीं बनाता, तो मध्यक्रम पर दबाव आता है और यही न्यूजीलैंड के खिलाफ देखने को मिला।

जडेजा का ऑलराउंड रोल रहा गायब
रवींद्र जडेजा से गेंद और बल्ले दोनों से उम्मीद थी, लेकिन इस सीरीज में वह पूरी तरह फीके रहे। बीच के ओवरों में न वह रन रोक पाए और न विकेट निकाल सके। ग्लेन फिलिप्स और डेरिल मिचेल ने उनके खिलाफ आसानी से रन बटोरे। तीसरे वनडे में छह ओवर में 41 रन देकर विकेट न लेना उनकी नाकामी को दिखाता है। बल्लेबाजी में भी उनके स्कोर 4, 27 और 12 ही रहे। जडेजा की विफलता ने टीम बैलेंस बिगाड़ दिया और अक्षर पटेल को मौका देने की मांग को बल मिला।
कप्तानी के दबाव में शुभमन गिल
शुभमन गिल की कप्तानी की शुरुआत भी निराशाजनक रही। वह अब तक दो वनडे सीरीज में कप्तान रहे हैं और दोनों ही गंवाई हैं। ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के खिलाफ हार ने उनकी रणनीति पर सवाल खड़े किए। बल्लेबाजी में उन्होंने तीन पारियों में 135 रन बनाए और दो अर्धशतक भी लगाए, लेकिन अच्छी शुरुआत को बड़ी पारी में नहीं बदल सके। कप्तानी का दबाव उनकी बल्लेबाजी पर भी साफ नजर आया, खासकर तीसरे वनडे में जब वह सिर्फ 23 रन बना सके।
मध्यक्रम पूरी तरह बिखरा
इस सीरीज में भारत का मध्यक्रम सबसे कमजोर कड़ी साबित हुआ। तीसरे वनडे में भारत का स्कोर 28 बिना विकेट से 71 रन पर चार विकेट हो गया। केएल राहुल और श्रेयस अय्यर दबाव में न स्ट्राइक घुमा सके और न ही साझेदारी बना सके। विराट कोहली का 124 रन का शतक अकेली लड़ाई बनकर रह गया। नीतीश रेड्डी ने 52 रन बनाकर कोशिश जरूर की, लेकिन टीम को जरूरी सहयोग नहीं मिला। अगर पुछल्ले बल्लेबाज थोड़ा साथ न देते, तो हार का अंतर और बड़ा हो सकता था।
गेंदबाजी में प्लान बी की कमी
भारतीय गेंदबाजी भी पूरी सीरीज में असरदार नहीं दिखी। न्यूजीलैंड तीनों मैचों में लगभग 300 से ज्यादा का स्कोर बनाने में सफल रहा। तीसरे वनडे में कीवियों ने आठ विकेट पर 337 रन बनाए। सिराज और कुलदीप ने विकेट तो लिए, लेकिन दबाव नहीं बना सके। हर्षित राणा ने विकेट जरूर लिए, लेकिन काफी रन लुटाए। प्रसिद्ध कृष्णा बेअसर रहे और नीतीश रेड्डी गेंद से कुछ खास नहीं कर सके। डेथ ओवर्स में जसप्रीत बुमराह की कमी साफ खली।
रणनीति और चयन पर उठे सवाल
टीम चयन और रणनीति भी सवालों के घेरे में रही। मिचेल जैसे बल्लेबाज के सामने स्पिनरों का ज्यादा इस्तेमाल किया गया, जबकि वह स्पिन को अच्छे से खेलते हैं। प्रसिद्ध कृष्णा को भारतीय पिचों पर मौका दिया गया, जहां उन्हें मनचाही उछाल नहीं मिली। श्रेयस अय्यर की वापसी भी निराशाजनक रही। तीन मैचों में उन्होंने सिर्फ 60 रन बनाए और नंबर चार पर उनकी नाकामी टीम पर भारी पड़ी। साथ ही नीतीश रेड्डी का प्रयोग फिर विफल रहा और हार्दिक पांड्या की कमी साफ महसूस हुई।






