Lucknow City

अस्पतालों में बहाने नहीं, बेहतर इलाज चाहिए… CM योगी का अफसरों को अल्टीमेटम

प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर मुख्यमंत्री का रुख सख्त, उच्चस्तरीय बैठक में दिए निर्देश- इलाज में दिखे संवेदनशीलता, तकनीक और जवाबदेही, यूपी में मेडिकल कॉलेज 44 से बढ़कर 83, 26 करोड़ से ज्यादा मरीजों को मिली ओपीडी सेवा

लखनऊ, 26 मई 2026:

यूपी में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को बेहद सख्त और आक्रामक रुख अपनाया। स्वास्थ्य तथा चिकित्सा शिक्षा विभागों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि सरकारी अस्पतालों में इलाज, जांच, दवाओं और आपात सेवाओं की गुणवत्ता में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का लाभ सीधे आम आदमी तक दिखाई देना चाहिए।

सीएम योगी ने अस्पतालों में तीन माह से कम एक्सपायरी वाली दवाओं पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मरीजों को गुणवत्तापूर्ण दवाएं और समय पर उपचार मिलना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि तकनीक, जवाबदेही और संवेदनशीलता ये तीनों स्वास्थ्य व्यवस्था में एक साथ दिखने चाहिएं तभी जनता का भरोसा मजबूत होगा।

बैठक में पेश आंकड़ों ने यूपी के स्वास्थ्य ढांचे में हुए बड़े बदलाव की तस्वीर भी सामने रखी। वर्ष 2016-17 में प्रदेश में 44 मेडिकल कॉलेज थे। उनकी संख्या अब बढ़कर 83 पहुंच गई है। यानी करीब 89 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि। एमबीबीएस सीटें 5390 से बढ़कर 12,800 हो गई हैं। पीजी सीटों की संख्या 1344 से बढ़कर 5067 तक पहुंच चुकी है। सुपर स्पेशियलिटी सीटों में भी लगभग 165 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2025-26 में प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में 26.41 करोड़ ओपीडी और 1.23 करोड़ आईपीडी सेवाएं दी गईं। इसके अलावा 24.33 करोड़ पैथोलॉजी जांचें भी की गईं। प्रदेश में इस समय 108 जिला चिकित्सालय, 106 विशिष्ट चिकित्सालय, 976 सीएचसी, 3757 पीएचसी और 27 हजार से अधिक स्वास्थ्य उपकेंद्र संचालित हैं।

मुख्यमंत्री ने आयुष्मान योजना को गरीबों का सबसे बड़ा सहारा बताते हुए अस्पतालों के क्लेम भुगतान समय पर करने के निर्देश दिए। प्रदेश में अब तक 96.75 लाख से अधिक मरीजों का मुफ्त इलाज हो चुका है। 6480 अस्पताल योजना से जुड़े हैं। सीएम ने आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी की आईपीडी सेवाओं को भी कैशलेस योजना में शामिल करने की बात कही।

बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर भी विशेष जोर दिया गया। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत 15.28 करोड़ से ज्यादा आभा आईडी बनाई जा चुकी हैं, जबकि 15.14 करोड़ इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड लिंक किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने मेडिकल रिसर्च और मेडटेक सेक्टर को बढ़ावा देने के निर्देश देते हुए कहा कि यूपी को स्वास्थ्य अनुसंधान का बड़ा केंद्र बनाया जाए।

लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया संस्थान में 376 से अधिक रोबोटिक सर्जरी और 250 से ज्यादा किडनी ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं। यहां प्रदेश का पहला गामा नाइफ सेंटर भी स्थापित किया जा रहा है। वहीं एसजीपीजीआई में 500 बेड के एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर पर तेजी से काम चल रहा है।

सीएम योगी ने एम्बुलेंस रिस्पॉन्स टाइम घटाने, आशा वर्करों का भुगतान लंबित न रखने, कोविड काल में सेवाएं देने वाले स्वास्थ्यकर्मियों के समायोजन और टीबी उन्मूलन अभियान को जनआंदोलन बनाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हर गर्भवती महिला, हर मरीज और हर जरूरतमंद तक समय पर बेहतर इलाज पहुंचना ही सरकार की असली सफलता होगी।

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