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हक नहीं, सिर्फ वादे : महिला आरक्षण पर कांग्रेस का भाजपा पर जोरदार प्रहार

लखनऊ में आयोजित संगोष्ठी में कांग्रेस नेताओं ने साधा निशाना, कहा कि 2023 में बिल पास, फिर भी लागू करने में देरी क्यों?

लखनऊ, 26 अप्रैल 2026:

यूपी की राजधानी लखनऊ स्थित कांग्रेस प्रदेश कार्यालय में रविवार को महिला आरक्षण अधिनियम: सम्मान या छलावा विषय पर आयोजित संगोष्ठी में राजनीतिक माहौल गर्म नजर आया। कार्यक्रम में कांग्रेस नेताओं के साथ बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया और केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखे सवाल उठाए।

कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे ने कहा कि महिलाओं को बराबरी का हक देना कांग्रेस की मूल विचारधारा का हिस्सा रहा है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने हमेशा महिलाओं को मुख्यधारा में लाने का काम किया। इसका परिणाम देश को पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में इंदिरा गांधी के रूप में मिला। उन्होंने सोनिया गांधी के नेतृत्व का जिक्र करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में महिलाओं के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं शुरू हुईं।

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पांडे ने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि 2023 में महिला आरक्षण बिल पास होने के बावजूद उसे लागू नहीं किया जा रहा। इससे सरकार की नीयत पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस और राहुल गांधी ने इस बिल को पास कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि कांग्रेस सभी वर्गों को साथ लेकर चलने में विश्वास करती है और महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने भाजपा नेतृत्व पर व्यक्तिगत स्तर पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग महिला सम्मान की बात करते हैं वे अपने जीवन में ही इसका पालन नहीं करते।

संगोष्ठी की मुख्य वक्ता, समाज सेविका एवं लखनऊ विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति प्रो. रूपरेखा वर्मा ने महिला आरक्षण लागू करने में देरी को महिलाओं के साथ मजाक बताया। उन्होंने कहा कि जब 2023 में बिल पास हो गया था तो उसे तत्काल लागू क्यों नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सीटों के परिसीमन के बहाने आरक्षण को टाल रही है।

नेता विधानमंडल दल आराधना मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा महिलाओं के उत्थान के लिए काम किया, जबकि भाजपा पहले पंचायत स्तर पर महिला आरक्षण का विरोध कर चुकी है। सामाजिक कार्यकर्ता नाइस हसन ने देश में महिलाओं की गिरती स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि भारत ग्लोबल रैंकिंग में 141वें स्थान पर है और न्यायपालिका में महिलाओं की भागीदारी बेहद कम है।

संगोष्ठी में एचएल दुसाध, संपूर्णानंद मिश्रा, सोहेल अंसारी सहित कई नेताओं और महिलाओं ने भाग लिया। कार्यक्रम में एक स्वर में महिला अधिकारों की लड़ाई तेज करने का संकल्प लिया गया।

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