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अब एक-एक सिगरेट पर टैक्स का बोझ : केंद्र का बड़ा फैसला, तंबाकू, खैनी, जर्दा व गुटखा भी महंगे

केंद्र सरकार ने कर व्यवस्था में बड़ा और सख्त बदलाव करते हुए आज से लागू की नई टैक्स प्रणाली, इस अतिरिक्त टैक्स बोझ का सीधा असर खपत पर पड़ने से सिगरेट व अन्य तंबाकू उत्पादों की बिक्री में गिरावट की संभावना

बिजनेस डेस्क, 1 फरवरी 2026:

केंद्र सरकार ने सिगरेट, तंबाकू और पान मसाला जैसे उत्पादों पर कर व्यवस्था में बड़ा और सख्त बदलाव करते हुए आज से नई टैक्स प्रणाली लागू कर दी है। इसके तहत इन उत्पादों पर जीएसटी की अधिकतम दर 40 फीसदी के साथ अतिरिक्त केंद्रीय उत्पाद शुल्क, स्वास्थ्य उपकर और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर वसूला जाएगा। इस फैसले के साथ ही जुलाई 2017 से लागू 28 फीसदी जीएसटी और मुआवजा सेस की पुरानी व्यवस्था समाप्त हो गई है।

नई नीति के अनुसार अब चबाने वाले तंबाकू, खैनी, जर्दा और गुटखा जैसे उत्पादों के लिए एमआरपी आधारित मूल्यांकन प्रणाली लागू होगी। यानी इन पर जीएसटी की गणना पैकेट पर छपे खुदरा बिक्री मूल्य के आधार पर की जाएगी। वहीं पान मसाला निर्माताओं को नए सेस कानून के तहत एक फरवरी से दोबारा पंजीकरण कराना अनिवार्य कर दिया गया है।

सरकार ने टैक्स चोरी पर अंकुश लगाने के लिए निगरानी व्यवस्था भी सख्त कर दी है। सभी पैकिंग मशीनों पर सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य होगा और इनकी रिकॉर्डिंग कम से कम 24 महीने तक सुरक्षित रखनी होगी। इसके अलावा मशीनों की संख्या और उत्पादन क्षमता की पूरी जानकारी शुल्क विभाग को देनी होगी।

नई दरों के तहत चबाने वाले तंबाकू पर 82 फीसदी और गुटखे पर 91 फीसदी तक उत्पाद शुल्क लगाया गया है।
संशोधित केंद्रीय उत्पाद शुल्क कानून के अनुसार सिगरेट पर उसकी लंबाई और बनावट के आधार पर प्रति स्टिक 2.05 रुपये से लेकर 8.50 रुपये तक अतिरिक्त शुल्क देना होगा। बिना फिल्टर वाली छोटी सिगरेट पर करीब 2.05 रुपये, जबकि प्रीमियम लंबी सिगरेट पर लगभग 5.40 रुपये प्रति स्टिक कर लगेगा। विशेष बनावट वाली सिगरेट पर सबसे अधिक 8.50 रुपये प्रति स्टिक शुल्क तय किया गया है।

उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इस अतिरिक्त टैक्स बोझ का सीधा असर खपत पर पड़ेगा और अगले वित्त वर्ष में सिगरेट की बिक्री में 6 से 8 फीसदी तक गिरावट देखने को मिल सकती है। सरकार का तर्क है कि यह कदम स्वास्थ्य सुरक्षा के साथ-साथ राजस्व बढ़ाने की दिशा में अहम साबित होगा।

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