UP Politics : ओवैसी की एंट्री से सपा के वोट बैंक में सेंध! राजभर ने 2027 को लेकर किया बड़ा दावा
मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने मुस्लिम वोटों को लेकर सपा मुखिया पर साधा निशाना, बोले अब अपने राजनीतिक हक की मांग कर रहा मुस्लिम समाज, सुभासपा अध्यक्ष का दावा, ओवैसी की रैलियों में भीड़ देखकर गठबंधन के फायदे-नुकसान का आकलन करा रही सपा, आजमगढ़ में भी सपा को नुकसान पहुंचने की जताई आशंका, बिहार में तेजस्वी यादव व पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी का दिया उदाहरण

लखनऊ, 13 अक्टूबर 2026:
यूपी में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मुस्लिम वोटों को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री व सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए दावा किया कि असदुद्दीन ओवैसी की बढ़ती सक्रियता से सपा की चिंता बढ़ गई है। राजभर के मुताबिक, ओवैसी की रैलियों में उमड़ रही भीड़ को देखते हुए सपा गठबंधन की संभावनाओं को लेकर गोपनीय सर्वे करा रही है।
मुस्लिम वोटों पर सपा की पकड़ कमजोर होने का दावा
राजभर ने कहा कि अब मुस्लिम समाज सपा से राजनीतिक हिस्सेदारी मांग रहा है। उनके मुताबिक, पहले मुस्लिम मतदाताओं का बड़ा हिस्सा सपा के साथ रहता था, लेकिन अब ओवैसी की सक्रियता से यह समीकरण बदल सकता है। राजभर ने दावा किया कि मुस्लिम समाज को एहसास होने लगा है कि सपा ने उसके समर्थन का पूरा राजनीतिक फायदा उठाया, लेकिन उसे बराबर की हिस्सेदारी नहीं दी।
ओवैसी को गठबंधन का प्रस्ताव ठुकराने की बात उठाई
राजभर ने दावा किया कि ओवैसी पहले ही अखिलेश यादव के सामने गठबंधन का प्रस्ताव रख चुके थे, लेकिन उस समय सपा ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। अब ओवैसी की रैलियों में जुट रही भीड़ को देखकर पार्टी नए सिरे से राजनीतिक समीकरणों का आकलन कर रही है। राजभर ने बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता तेजस्वी यादव व पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी का उदाहरण देते हुए कहा कि ओवैसी की राजनीतिक ताकत को कम आंकना दूसरी पार्टियों के लिए नुकसानदेह हो सकता है। उनका दावा है कि यूपी में भी ओवैसी की मौजूदगी सपा के पारंपरिक मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगा सकती है।
‘सपा में मुसलमानों को सिर्फ दरी बिछाने तक सीमित रखा’
सपा पर हमला बोलते हुए राजभर ने आरोप लगाया कि पार्टी ने मुस्लिम समाज को राजनीतिक हिस्सेदारी देने के बजाय चुनावी गतिविधियों तक सीमित रखा। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मुस्लिम समाज लंबे समय से सपा का समर्थन करता रहा है, तो पार्टी में मुस्लिम नेताओं की मौजूदगी के बावजूद मुख्यमंत्री पद पर किसी मुस्लिम नेता की दावेदारी क्यों नहीं होती। राजभर ने कहा कि ओवैसी इसी राजनीतिक प्रतिनिधित्व का सवाल उठा रहे हैं। उनके मुताबिक, मुस्लिम समाज को केवल दूसरे नेताओं को मुख्यमंत्री बनाने की राजनीति तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सरकारी नौकरियों व सत्ता में अपनी भागीदारी पर भी जोर देना चाहिए।
ओवैसी के साथ पीस पार्टी का भी किया जिक्र
राजभर ने कहा कि मुस्लिम मतदाताओं के सामने अब सपा के अलावा दूसरे राजनीतिक विकल्प भी हैं। उन्होंने ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख ओवैसी के साथ पीस पार्टी के अध्यक्ष डॉ. अय्यूब की सक्रियता का भी जिक्र किया। राजभर का दावा है कि मुस्लिम समाज की राजनीतिक ताकत को देखते हुए अब उसके प्रतिनिधित्व का सवाल ज्यादा अहम हो गया है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम मतदाता पहले की तरह एकमुश्त सपा के साथ नहीं रहेंगे, जिससे 2027 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को नुकसान हो सकता है।
आजमगढ़ में भी सपा को नुकसान की भविष्यवाणी
राजभर ने आजमगढ़ का जिक्र करते हुए दावा किया कि पिछले चुनाव में प्रचार के बिना भी ओवैसी को वहां करीब तीन प्रतिशत वोट मिले थे। इस बार AIMIM पहले से सक्रिय है, ऐसे में सपा को आजमगढ़ में भी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
2027 में सपा के प्रदर्शन पर उठाए सवाल
राजभर ने दावा किया कि आगामी विधानसभा चुनाव में मुस्लिम मतदाताओं का एकमुश्त समर्थन सपा को नहीं मिलेगा। उन्होंने अखिलेश यादव के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि मुस्लिम समाज में पार्टी को लेकर नाराजगी है। राजभर ने यहां तक दावा किया कि 2027 के चुनाव में सपा का प्रदर्शन इतना खराब हो सकता है कि 2017 में बची उसकी राजनीतिक साख भी खत्म हो जाए।






