लखनऊ, 14 जनवरी 2026:
माघ माह में आने वाली षटतिला एकादशी आस्था और पुण्य का विशेष पर्व मानी जाती है। हिंदू पंचांग के अनुसार माघ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को षटतिला एकादशी कहा जाता है। यह दिन भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने और जीवन से कष्ट दूर करने का अवसर देता है। मान्यता है कि इस पावन तिथि पर श्रद्धा और नियमों के साथ किया गया व्रत व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग खोलता है।
षटतिला एकादशी की तिथि और समय क्या है?
वैदिक पंचांग के अनुसार षटतिला एकादशी 14 जनवरी 2026 यानी आज मनाई जा रही है। माघ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 13 जनवरी को दोपहर 03 बजकर 17 मिनट पर हुई वहीं तिथि का समापन 14 जनवरी को शाम 05 बजकर 52 मिनट पर होगा।

व्रत पारण का सही समय क्या है?
एकादशी व्रत का पारण हमेशा द्वादशी तिथि पर ही किया जाता है। षटतिला एकादशी का व्रत पारण 15 जनवरी को सुबह 07 बजकर 15 मिनट से 09 बजकर 21 मिनट तक किया जा सकता है।
पूजा में तिल और तुलसी का विशेष स्थान
षटतिला एकादशी के दिन पूजा में तिल और तुलसी दल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि तिल से जुड़े कार्य करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं। वहीं तुलसी दल के बिना विष्णु पूजा अधूरी मानी जाती है। इस दिन श्रद्धा भाव से की गई पूजा का विशेष फल प्राप्त होता है।

23 वर्षों बाद बना दुर्लभ संयोग
ज्योतिषीय दृष्टि से यह वर्ष खास माना जा रहा है। वर्ष 2003 के बाद अब 2026 में एक बार फिर मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी एक ही दिन पड़ रही हैं। करीब 23 वर्षों बाद बने इस दुर्लभ संयोग को बहुत ही शुभ और फलदायी माना गया है। धार्मिक दृष्टि से इस योग में किया गया व्रत और दान कई गुना फल देता है।
व्रत पारण विधि और दान का महत्व
व्रत पारण के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ कपड़े पहनें और घर व मंदिर की सफाई करें। देसी घी का दीपक जलाकर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करें। विष्णु मंत्र और विष्णु चालीसा का पाठ करें। सात्विक भोजन का भोग लगाएं और उसमें तुलसी पत्र अवश्य रखें। इसके बाद प्रसाद का वितरण करें। मकर संक्रांति के साथ पड़ने के कारण इस दिन तिल का दान विशेष फलदायी माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार तिल दान करने से भगवान विष्णु और शनि देव की कृपा प्राप्त होती है। इसके अलावा धन, वस्त्र और अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करने से भी शुभ फल मिलता है।





