योगेंद्र मलिक
उत्तरकाशी, 6 जनवरी 2026:
उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में इस वर्ष सर्दी ने अब तक के कई रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। तीव्र शीत लहर के चलते गोमुख ग्लेशियर से लेकर गंगोत्री धाम तक भागीरथी नदी कई स्थानों पर पूरी तरह जम चुकी है। निचले इलाकों में भी नदी के अनेक हिस्से मोटी बर्फ की चादर में कैद हो गए हैं। ऊपरी क्षेत्रों के छोटे-बड़े झरने भी पाले की गिरफ्त में आ चुके हैं। इससे पूरा क्षेत्र बर्फीली चुप्पी और अद्भुत प्राकृतिक दृश्य में तब्दील हो गया है।
जनवरी माह की शुरुआत के बावजूद राज्य में अब तक बारिश लगभग नदारद है। केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की बर्फबारी जरूर हुई है लेकिन यह सामान्य से काफी कम रही। आश्चर्य की बात यह है कि गंगोत्री धाम में अब तक कोई उल्लेखनीय बर्फबारी नहीं हुई। इसके बावजूद यहां की साल भर बहने वाली छोटी-बड़ी नदियां और जलधाराएं बर्फ की परतों में तब्दील हो चुकी हैं।
राज्य में शीत लहर का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। तापमान में तेज गिरावट दर्ज की जा रही है। ऊंचाई वाले इलाकों में पारा माइनस 10 से माइनस 15 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। कई स्थानों पर माइनस 20 डिग्री से नीचे का तापमान भी रिकॉर्ड किया गया है। गंगोत्री क्षेत्र में तापमान माइनस 0 से माइनस 12 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार हवा में नमी की भारी कमी और लगातार साफ आसमान के कारण बर्फबारी नहीं हो पा रही। इससे ठंड और अधिक तीव्र महसूस की जा रही है। आने वाले दिनों में हालात और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।

इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद गंगोत्री धाम में करीब 25 साधु-संत साधना में लीन हैं। गंगोत्री नेशनल पार्क के छह कर्मचारी, पुलिस के दो जवान, मंदिर समिति का स्टाफ, आईटीबीपी और भारतीय सेना के जांबाज भी विषम हालात में अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं। हालांकि, पेयजल लाइनें जम जाने से सबसे अधिक परेशानी सामने आ रही है। माइनस 20 डिग्री से नीचे तापमान में भारत-तिब्बत सीमा पर तैनात जवानों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। thehohalla news
गोमुख से गंगोत्री तक जमी भागीरथी नदी और ऊपरी झरनों की बर्फीली तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और वातावरण में नमी की कमी के कारण ऐसी चरम स्थितियां लगातार बढ़ रही हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने उच्च हिमालयी क्षेत्रों में राहत और निगरानी कार्य तेज कर दिए हैं। पर्यटकों को इन क्षेत्रों की यात्रा न करने की सलाह दी गई है।






