Uttarakhand

38 करोड़ के घोटाले पर RBI की सख्ती : देहरादून अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक के हजारों खाताधारक बेहाल

खाताधारकों ने बैंक प्रबंधन के साथ आरबीआई की भूमिका पर भी खड़े किए सवाल, बड़े बैंक में विलय और उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग

राजकिशोर तिवारी

देहरादून, 18 फरवरी 2026:

देहरादून के अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड में सामने आए कथित 38 करोड़ रुपये के घोटाले के बाद खाताधारकों में भारी आक्रोश है। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा बैंक के सभी वित्तीय लेन-देन पर छह महीने के लिए रोक लगाए जाने से करीब नौ हजार खाताधारकों की जमा राशि फंस गई है। लोग अपनी ही जमा पूंजी नहीं निकाल पा रहे। इससे परिवारों के रोजमर्रा के खर्च और छोटे कारोबार ठप पड़ गए हैं।

प्रेस क्लब में बुधवार को हुई पत्रकार वार्ता में खाताधारकों ने बैंक प्रबंधन के साथ-साथ आरबीआई की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए। खाताधारकों का आरोप है कि बैंक प्रबंधन ने वर्ष 2012-13 के दौरान नियमों को ताक पर रखकर बड़े पैमाने पर ऋण वितरित किए। विशेष तौर पर 38 जेसीबी मशीनों के लिए फाइनेंसिंग की गई लेकिन इनमें से एक भी ऋण की वसूली नहीं हो पाई। वहीं आरबीआई ने घोटाले को 2013-14 से जोड़ते हुए कार्रवाई की बात कही है।

RBI Action on Dehradun Urban Co-operative Bank Revealed (1)

खाताधारकों का कहना है कि पिछले 12 वर्षों से बैंक का नियमित ऑडिट होता रहा। इसके बावजूद इतने बड़े घोटाले का समय रहते सामने न आना आरबीआई की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। आरोप है कि पहले बैंक अधिकारी मामले को दबाने की कोशिश करते रहे लेकिन सच्चाई उजागर होने के बाद वे चुप्पी साध गए।

आरबीआई क निर्देश के तहत 10 फरवरी से बैंक के सभी वित्तीय लेन-देन पर रोक लगा दी गई है। इससे खाताधारकों में भय और असुरक्षा का माहौल है। खाताधारकों ने बैंक का किसी मजबूत बैंक में विलय करने, सरकार के सक्षम अधिकारी द्वारा बैंक के रिकॉर्ड अपने कब्जे में लेने और बांटे गए ऋणों सहित पूरे घोटाले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। साथ ही दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई गई।

खाताधारकों ने सहकारिता मंत्री और डीएम से मुलाकात कर अपनी बात रखने की भी घोषणा की। इस दौरान प्रेस क्लब परिसर में बैंक प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की गई। वार्ता में सचिन गुप्ता, मुकेश शर्मा, अशोक शर्मा, रजत अग्रवाल सहित कई खाताधारक मौजूद रहे।

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