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पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर ने दिया पत्र का हवाला, कहा… इसे पढ़ें, गुमराह न हों, जानें पूरा मामला

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के हस्तक्षेप के बाद हरदोई के संडीला स्थित सलीहा और मलीहा स्मारकों को लेकर चल रहे लंबे विवाद में आया नया मोड़, पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर ने आयोग के पत्र का हवाला देते हुए कहा कि तथ्यों को समझे बिना भ्रम फैलाने की कोशिश न की जाए

प्रमोद कुमार

मलिहाबाद (लखनऊ), 16 मई 2026:

पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री कौशल किशोर ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के पत्र का हवाला देते हुए कहा है कि हरदोई के संडीला क्षेत्र में पासी समाज के महापुरुषों से जुड़े स्मारकों के संबंध में स्थिति पूरी तरह स्पष्ट है। उन्होंने लोगों से अपील की कि पत्र को ध्यान से पढ़ें, गुमराह न हों और तथ्यों के आधार पर ही अपनी राय बनाएं।

भारत सरकार के National Commission for Scheduled Castes (एनसीएससी) ने संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत जिलाधिकारी हरदोई को पत्र भेजकर निर्देश दिया है कि संडीला क्षेत्र में सलीहा और मलीहा से जुड़े स्मृति द्वार, स्मारक और अन्य स्थलों पर जहां ‘अर्कवंशी’ लिखा है, वहां उसे हटाकर ‘पासी’ अंकित किया जाए।

इससे पहले उत्तर प्रदेश शासन भी जिलाधिकारी हरदोई को इसी आशय का पत्र भेज चुका है। शासन ने कहा था कि अर्कवंशी समाज की ओर से पर्याप्त प्रमाणिक साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जा सके, इसलिए सलीहा और मलीहा को पासी समाज के महापुरुष मानते हुए नाम संशोधन की कार्रवाई की जाए।

सलीहा और मलीहा के स्मारकों को लेकर संडीला क्षेत्र में लंबे समय से पासी और अर्कवंशी समाज के बीच विवाद चल रहा था। दोनों समुदाय इन महापुरुषों पर अपना दावा कर रहे थे। प्रशासनिक सुनवाई के दौरान उपलब्ध कराए गए साक्ष्यों के परीक्षण के बाद शासन और अब राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने पासी समाज के पक्ष को स्वीकार किया है।

कौशल किशोर ने आयोग के इस हस्तक्षेप को इतिहास और पहचान की बड़ी जीत बताया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय पासी समाज के सम्मान से जुड़ा है और जिला प्रशासन को आयोग के निर्देशों का शीघ्र अनुपालन सुनिश्चित करना चाहिए।

अब जिलाधिकारी हरदोई को राज्य सरकार और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, दोनों के निर्देशों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई करनी है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार स्मारकों पर नाम संशोधन की प्रक्रिया जल्द शुरू हो सकती है। स्थानीय स्तर पर यह उम्मीद जताई जा रही है कि इस निर्णय से लंबे समय से चला आ रहा विवाद समाप्त होगा।

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