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रील वाली बॉडी या रियल सेहत…युवाओं में बढ़ रही सिक्स पैक्स की चाह, जानिए फिटनेस का पूरा सच

मस्कुलर बॉडी पाने की होड़ में कई युवा बिना जानकारी ले रहे सप्लीमेंट्स, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और विज्ञापनों से बढ़ रहा प्रलोभन

न्यूज डेस्क, 22 मई 2026:

देश में युवाओं के बीच मस्कुलर बॉडी और सिक्स पैक एब्स बनाने का क्रेज अब एक स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या का रूप ले रहा है। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और विज्ञापनों के प्रलोभन में आकर, बॉलीवुड सितारों की मस्कुलर बॉडी देखकर बड़ी संख्या में युवा जिम का रुख कर रहे है और सप्लीमेंट्स खरीद रहे हैं लेकिन उन्हें सप्लीमेंट्स की सही डोज या संभावित दुष्प्रभावों की सटीक जानकारी नहीं होती जिससे उन्हें आगे चलकर हेल्थ प्रॉब्लम हो सकती है।

मेडिकल संस्था ‘आईसीएमआर’ की सख्त चेतावनी

भारत की सबसे बड़ी और प्रामाणिक मेडिकल संस्था इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने अपनी राष्ट्रीय गाइडलाइंस जारी कर युवाओं को साफ चेतावनी दी है कि बिना डॉक्टरी सलाह के डिब्बाबंद प्रोटीन सप्लीमेंट्स लेना सेहत के लिए भारी जोखिम है। ये सप्लीमेंट्स हड्डियों को कमजोर कर सकते हैं और शरीर में कैल्शियम की कमी पैदा कर सकते हैं। लगातार हाई-प्रोटीन पाउडर लेने से यूरिया का स्तर बढ़ता है जिससे किडनी फेलियर जैसी समस्याएं हो सकती है। भारत में बिकने वाले कई लोकप्रिय प्रोटीन सप्लीमेंट्स की शुद्धता और लेबलिंग में भी कमियां पाई गई हैं। अध्ययन में पाया गया कि कुछ ब्रांड्स के उत्पादों में प्रोटीन की वास्तविक मात्रा उनके लेबल पर किए गए दावों से कम थी।

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सिक्स पैक एब्स का मतलब फिटनेस नहीं है

सेलिब्रिटी फिटनेस एक्सपर्ट्स और जर्नल ऑफ क्लिनिकल मेडिसिन की स्टडीज के अनुसार समाज में यह गलत धारणा बन गई है कि सपाट पेट या सिक्स-पैक एब्स ही पूरी तरह फिट होने की निशानी है। कई लोग खुद को स्लिम करने के चलते अपना बॉडी फैट कम करने लग जाते हैं जबकि वैज्ञानिक रूप से शरीर में जरूरी फैट के कम होने से दिल, नसों और पेट के अंदरूनी अंगों को सुरक्षा नहीं मिल पाती। इसके कारण ब्लड प्रेशर का बढ़ना, डिहाइड्रेशन और अचानक कार्डियक अरेस्ट होना जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

रखें कुछ सावधानी, रहेंगे सुरक्षित

किसी भी सप्लीमेंट को शुरू करने से पहले एक योग्य डॉक्टर या प्रमाणित न्यूट्रिशनिस्ट से परामर्श जरूर लें। हमेशा वही उत्पाद चुनें जो भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा प्रमाणित हों। अपनी प्रोटीन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सत्तू, दालें, पनीर, अंडे और सोयाबीन जैसे प्राकृतिक स्रोतों पर भरोसा करना अधिक सुरक्षित और प्रभावी माना गया है। यदि कोई व्यक्ति सप्लीमेंट ले रहा है तो समय-समय पर किडनी और लिवर फंक्शन टेस्ट करवाना स्वास्थ्य की निगरानी के लिए बेहतर होता है। स्वस्थ शरीर के लिए सही पोषण और व्यायाम का संतुलन जरूरी है। किसी भी डाइट प्लान को अपनी व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार ही अपनाना चाहिए।

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