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UP में ‘आनंद कारज’ विवाह का पंजीकरण होगा आसान, योगी कैबिनेट ने रजिस्ट्रीकरण नियमावली-2026 को दी मंजूरी

नई व्यवस्था से सिख धर्म में प्रचलित ‘आनंद कारज’ विवाह का पंजीकरण होगा अधिक आसान, तहसील से लेकर राज्य स्तर तक तय होंगे रजिस्ट्रार, तीन महीने के भीतर कराना होगा विवाह पंजीकरण

लखनऊ, 11 मार्च 2026:

यूपी सरकार ने सिख समुदाय के विवाह पंजीकरण को सरल और व्यवस्थित बनाने की दिशा में अहम कदम उठाया है। सीएम योगी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश आनंद विवाह रजिस्ट्रीकरण नियमावली, 2026 को प्रख्यापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। इस नई व्यवस्था के लागू होने से सिख धर्म में प्रचलित ‘आनंद कारज’ विवाह का पंजीकरण अब अधिक आसान और सुव्यवस्थित हो सकेगा।

यह नियमावली आनंद मैरिज एक्ट, 1909 (संशोधित 2012) की धारा-6 के तहत राज्य सरकार को प्राप्त अधिकारों के आधार पर तैयार की गई है। साथ ही यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट में दायर अमनजोत सिंह चड्ढा बनाम भारत संघ व अन्य मामले में 4 सितम्बर 2025 को दिए गए निर्देशों के अनुपालन में लिया गया है।

नई नियमावली के तहत विवाह पंजीकरण की व्यवस्था प्रशासनिक ढांचे के विभिन्न स्तरों पर निर्धारित की गई है। तहसील स्तर पर एसडीएम को रजिस्ट्रार बनाया जाएगा, जबकि जनपद स्तर पर डीएम को जिला रजिस्ट्रार नामित किया गया है। मंडल स्तर पर मंडलायुक्त को मंडलीय रजिस्ट्रार तथा राज्य मुख्यालय पर निदेशक, अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ को मुख्य रजिस्ट्रार की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।

नियमावली के अनुसार विवाह के पक्षकार या उनके रिश्तेदार विवाह संपन्न होने की तिथि से तीन महीने के भीतर निर्धारित प्रारूप में आवेदन कर सकेंगे। आवेदन के साथ 1500 रुपये का न्यायालय शुल्क स्टाम्प लगाना होगा। निर्धारित समय सीमा के बाद भी विवाह पंजीकरण का आवेदन किया जा सकेगा, हालांकि इसके लिए नियमानुसार विलंब शुल्क देना होगा।

इसके अतिरिक्त यदि किसी पक्ष को रजिस्ट्रार के आदेश से असंतोष होता है तो वह जिला रजिस्ट्रार के समक्ष अपील कर सकेगा। वहीं जिला रजिस्ट्रार के निर्णय के खिलाफ मंडलीय रजिस्ट्रार के पास अपील की व्यवस्था भी की गई है। नियमावली में विवाह रजिस्टर के रख-रखाव और उसकी प्रमाणित प्रति प्राप्त करने से जुड़े स्पष्ट प्रावधान भी शामिल किए गए हैं।

सरकार का मानना है कि इस नियमावली के लागू होने से प्रदेश में सिख समुदाय के आनंद विवाह का विधिवत पंजीकरण सुनिश्चित होगा। इससे विवाह संबंधी प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और समुदाय को सरकारी व्यवस्थाओं में अधिक सुविधा मिल सकेगी।

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