लखनऊ, 2 फरवरी 2026:
यूपी में 69 हजार शिक्षक भर्ती को लेकर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का गुस्सा सोमवार को राजधानी लखनऊ में फूट पड़ा। आरक्षण में कथित घोटाले और सुप्रीम कोर्ट में सरकार की ओर से प्रभावी पैरवी न किए जाने के आरोपों को लेकर अभ्यर्थियों ने प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के आवास का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी और पुलिस से झड़प के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
बड़ी संख्या में अभ्यर्थी सोमवार सुबह करीब 11 बजे डिप्टी सीएम के आवास के पास पहुंचे। अभ्यर्थियों का आरोप था कि 69 हजार शिक्षक भर्ती में आरक्षण के नियमों की अनदेखी की गई है। पिछड़े व दलित वर्ग के साथ अन्याय हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान सरकार का वकील पेश नहीं हो रहा जिससे तारीख पर तारीख मिल रही और अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटका हुआ है।

डिप्टी सीएम के आवास के बाहर अभ्यर्थियों के पहुंचते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में भारी पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस ने जब प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका तो वे भड़क गए। इसके बाद पुलिस और अभ्यर्थियों के बीच तीखी नोकझोंक होने लगी। हालात बिगड़ते देख पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर बसों में भरना शुरू कर दिया।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन्हें ठूस-ठूसकर बसों में बैठाया गया और इको गार्डन भेजा गया। इस दौरान कई बैनर भी फाड़ दिए गए। प्रदर्शन में कुछ अभ्यर्थी अपने शरीर और कपड़ों पर स्लोगन लिखकर पहुंचे थे। एक अभ्यर्थी ने ‘मैं अभागा पिछड़ा, दलित हूं’ और ‘सुप्रीम कोर्ट जातिवादी है’ जैसे नारे लिखे बैनर ओढ़ रखे थे। उनका कहना था कि 15 प्रतिशत सवर्णों के मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने एक दिन में फैसला दे दिया जबकि 85 प्रतिशत पिछड़े-दलित वर्ग के अभ्यर्थी महीनों से फैसले का इंतजार कर रहे हैं।

प्रदर्शनकारी अमरेंद्र कुमार ने कहा कि जब तक न्याय नहीं मिलेगा तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि नेता और मंत्री पुलिस के जरिए अभ्यर्थियों को डराने और पिटवाने का काम कर रहे हैं। अभ्यर्थियों ने साफ किया कि अब वे विधायकों और मंत्रियों का भी घेराव करेंगे और अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे।






