लखनऊ, 3 जनवरी 2026:
यूपी परिवहन विभाग की ओर से चलाए गए सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक नियमों के प्रति जागरूकता अभियानों का सकारात्मक असर साफ दिखाई दे रहा है। वर्ष 2025 में प्रदेश में ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के मामलों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। विभाग के आंकड़ों के अनुसार,वर्ष 2024 की तुलना में 2025 में लगभग चार लाख कम चालान किए गए। यह आमजन में बढ़ती जागरूकता और नियमों के बेहतर पालन का संकेत है।
परिवहन विभाग की हाल ही में हुई समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2024 में जहां कुल 17,58,930 चालान दर्ज किए गए थे, वहीं वर्ष 2025 में यह संख्या घटकर 13,78,919 रह गई। इन चालानों के माध्यम से लगभग 454.49 करोड़ रुपये का राजस्व वसूला गया। अधिकारियों का कहना है कि यह गिरावट केवल प्रवर्तन की सख्ती नहीं बल्कि लोगों में सड़क सुरक्षा को लेकर आई समझदारी का परिणाम है।

आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025 में सबसे अधिक 6,32,901 चालान हेलमेट न पहनने के मामलों में किए गए। इसके अलावा 14,535 ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित किए गए। सीट बेल्ट न लगाने के 1,33,189 मामले सामने आए। ओवरस्पीडिंग के मामलों में सबसे बड़ी राहत देखने को मिली जहां वर्ष 2024 में 7,77,897 मामले दर्ज हुए थे, वहीं 2025 में यह घटकर 3,30,171 रह गए। इसके साथ ही ड्रिंक एंड ड्राइव के 3,611 और रॉन्ग साइड ड्राइविंग के 56,079 मामले दर्ज किए गए।
व्यावसायिक वाहनों पर भी सख्त निगरानी रखी गई। ओवरलोडिंग के 54,923, गलत नंबर प्लेट के 11,892 और माल वाहनों से यात्री ढोने के 1,226 मामले सामने आए। स्पीड लिमिट डिवाइस न लगाने पर 20,431 चालान किए गए। विशेष चेकिंग अभियानों के दौरान अप्रैल में 36,773 अपंजीकृत ई-रिक्शा और 1,786 अंतरजनपदीय ओवरलोड मालवाहकों पर कार्रवाई हुई। मई, जून, सितंबर और अक्टूबर में भी अलग-अलग श्रेणियों में हजारों चालान दर्ज किए गए।
परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2026 में सड़क दुर्घटनाओं में और कमी लाने के लिए डिजिटल निगरानी और जागरूकता अभियानों को और तेज किया जाएगा। इसकी शुरुआत एक जनवरी से राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के साथ हो चुकी है। इस दौरान परिवहन, पुलिस, लोक निर्माण, स्वास्थ्य और सूचना विभाग मिलकर प्रदेशव्यापी अभियान चलाएंगे। नो हेलमेट, नो फ्यूल जैसे अभियानों के साथ ब्लैक स्पॉट और हाई रिस्क जोन पर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। इसके साथ ही स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए सुरक्षित सड़क संस्कृति को और मजबूत किया जाएगा।






