राजकिशोर तिवारी
देहरादून, 25 फरवरी 2026:
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून स्थित गांधी पार्क में बुधवार को गरीबों, भूमिहीनों और वन क्षेत्रों में पीढ़ियों से रह रहे लोगों के हक की आवाज गूंज उठी। कांग्रेस समेत इंडिया गठबंधन में शामिल दलों के नेताओं ने महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष धरना-प्रदर्शन कर राज्य सरकार पर विकास के नाम पर गरीबों को उजाड़ने का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को प्रदेशव्यापी स्तर पर तेज किया जाएगा।
धरने में बिंदु खाता, बापू ग्राम, बागवाला, बग्गा चौवन, गुलरानी टोंगिया सहित इंदिरा ग्राम, गांधी ग्राम और हरि ग्राम जैसी बस्तियों को राजस्व गांव का दर्जा देने की मांग प्रमुखता से उठी। नेताओं ने कहा कि वर्षों से वन क्षेत्रों (खत्ते-गोठ) में बसी हजारों बस्तियां आज भी बुनियादी अधिकारों से वंचित हैं। वन संरक्षण कानूनों और अदालती आदेशों का हवाला देकर सरकार जिम्मेदारी से बच रही है जबकि संतुलित विकास के मॉडल पर ठोस पहल नहीं हो रही।

धरने को संबोधित करते हुए हरीश रावत ने कहा कि यह केवल जमीन का सवाल नहीं बल्कि सम्मान और आजीविका का सवाल है। वन गुज्जरों को आवंटित भूमि का पूर्ण मालिकाना हक दिया जाए और पीढ़ियों से सरकारी भूमि पर बसे परिवारों को भूमिधारी अधिकार मिले। गठबंधन नेताओं ने विशेष सीलिंग भूमि और हिंदुस्तान पेपर पल्प से प्राप्त भूमि से ‘लैंड बैंक’ बनाकर आपदा-ग्रस्त गांवों के लोगों को वरिष्ठता के आधार पर बसाने की मांग रखी।
प्रदर्शन में राज्य सचिव लेखराज, भाकपा माले के राज्य सचिव इंद्रेश मैखुरी, कैलाश पांडे और बैंक यूनियन के पूर्व नेता जगमोहन समेत कई नेता मौजूद रहे। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि वन संरक्षण के नाम पर गरीबों का हक छीना जाना अन्याय है। सरकार को संवाद के जरिए समाधान निकालना होगा वरना सड़कों पर संघर्ष और तेज होगा।






